अब फलों-सब्जियों से बनेंगे जैम, विद्यार्थियों के साथ किसानों को भी मिलेगा फायदा

मोतिहारी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय में प्रसंस्करण-सह-मूल्य संवर्धन इकाई का लोकार्पण किया गया है. यह इकाई विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी और किसानों व ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगी.

Motihari News: पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, पीपराकोठी में प्रसंस्करण-सह-मूल्य संवर्धन इकाई का लोकार्पण किया गया. इकाई की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शिक्षा प्रभाग के वित्तीय सहयोग से की गई है. कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने इकाई का लोकार्पण करते हुए कहा कि उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन पर भी ध्यान देना जरूरी है. इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे.

विद्यार्थियों को मिलेगा प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण

लोकार्पण के अवसर पर कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने कहा कि महाविद्यालय में स्थापित इकाई विद्यार्थियों के शिक्षा एवं अनुसंधान के साथ कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

इकाई के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न फलों, सब्जियों और अन्य उद्यानिकी उत्पादों के प्रसंस्करण तथा उनसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.

किसानों और ग्रामीण युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर

कुलपति ने कहा कि प्रसंस्करण आधारित गतिविधियों से किसानों, ग्रामीण युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार शुरू करने में मदद मिल सकती है.

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स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि और उद्यानिकी उत्पादों का प्रसंस्करण कर उनके मूल्य में वृद्धि की जा सकेगी. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर लाभ मिलने की संभावना है.

जैम, जेली, अचार और सॉस बनाने की मिलेगी ट्रेनिंग

महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. के. प्रसाद ने बताया कि इकाई में फल और सब्जियों से विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करने की तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा सकता है.

इसमें जैम, जेली, स्क्वैश, अचार, सॉस, मुरब्बा, कैंडी और डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार करने की तकनीक शामिल है.

प्रशिक्षण और प्रदर्शन के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी तकनीक

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि इकाई के माध्यम से विभिन्न फलों एवं सब्जियों से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे.

वहीं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आरके झा ने कहा कि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं प्रसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी.

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

डॉ. आरके झा ने कहा कि स्थानीय संसाधनों के आधार पर प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे.

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे.

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By अमृतेश कुमार

अमृतेश 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. खबर पर हमेशा पैनी नजर रखने वाले अमृतेश को क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. वर्तमान में ये डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी लेखनी के जरिए लगातार सक्रिय हैं.

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