Motihari: मौसम की बेरुखी से किसान हलकान, सूखने लगे खेतों में धान के बिचड़े

मानसून की बेरुखी व पानी की किल्लत किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है. अनुमंडल क्षेत्र में अबतक सामान्य वर्षा नहीं होने के कारण धान की रोपनी पर बुरा असर पड़ा है.

Motihari: रक्सौल . मानसून की बेरुखी व पानी की किल्लत किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है. अनुमंडल क्षेत्र में अबतक सामान्य वर्षा नहीं होने के कारण धान की रोपनी पर बुरा असर पड़ा है. जिन खेतों में पहले ही बिचड़े बोए गए थे, वे भी अब सूखने लगे हैं. किसानों के पास सिंचाई के लिए न तो बारिश है और न ही पर्याप्त बिजली आपूर्ति. इससे उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. किसान संजय सिंह, रामाशंकर सर्राफ, शंभू साह, शिवशंकर यादव, संजय कुमार, सतीश सिंह, कमरूल होदा सहित अन्य किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण जैसे-तैसे कुछ खेतों में पम्प सेट से पानी 250 रुपये प्रति घंटा की खरीदारी कर धान की रोपणी की गयी है. लेकिन लगातार रह रही गर्मी के कारण खेत सूखने लगे है और खेतों में दरार पड़ने लगी है. किसानों ने बताया कि दो-चार दिन के अंदर यदि वर्षा नहीं हुई तो धान के बिचड़े पूरी तरह सूख या जल जाएंगे. किसानों का कहना है कि नहरों और अन्य स्रोतों से भी पानी सही से नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में खेतों में बिचड़े सूखने लगे हैं और रोपनी का कार्य रुक गया है. लगातार भीषण गर्मी के कारण किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और मिट्टी सूखकर फट रही है. मानसून में अब तक महीनों दिन की देरी हो चुकी है. किसानों का कहना है कि आषाढ़ माह के समाप्ति तक लगभग खेतों में रोपनी का कार्य समाप्त हो जाता था. लेकिन इस वर्ष बारिश नहीं होने के कारण अभी आधार से ज्यादा खेत बंजर पड़ा है. वहीं कृषि विभाग के पदाधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि अगर अगले एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की खेती का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा. पिछले साल की तुलना में इस बार जुलाई के पहले पखवाड़े तक रोपनी कार्य बहुत पीछे चल रहा है.

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Published by: Ajit kumar singh

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