Nepal Flood: नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी. बाढ़ से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन नुवाकोट में तीन अज्ञात शव बरामद किए गए हैं. वहीं कम से कम 17 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है. रसुवा के टिमुरे स्थित कस्टम कार्यालय के 14 कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ में बड़ी संख्या में घर, सड़क, पुल और पावर प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हुए हैं.
तीन शव बरामद, मौत का आधिकारिक आंकड़ा अब तक नहीं
जिला पुलिस कार्यालय रसुवा के एसपी बिपिन रेग्मी के अनुसार नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे से तीन अज्ञात शव बरामद किए गए हैं. इनमें दो शव सिमचौर और एक कोल्पुटार से मिला है.
हालांकि बाढ़ में कुल कितने लोगों की मौत हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है. राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है.
17 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बाढ़ में फंसे पांच लोगों को सुरक्षित निकालकर विदुर नगरपालिका-4 स्थित चक्रदेव अस्पताल पहुंचाया गया है. सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण त्रिशूली अस्पताल तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है.
नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर की मदद से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला है. इनमें छह लोगों को स्याफ्रुबेसी, दो को मैलुंग और चार लोगों को धुन्चे से रेस्क्यू किया गया.
राहत और बचाव अभियान में नेपाली सेना के चार तथा निजी क्षेत्र के आठ हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं.
टिमुरे कस्टम कार्यालय के 14 कर्मचारी लापता
वित्त मंत्रालय के सचिवालय के अनुसार रसुवा के टिमुरे कस्टम कार्यालय के 14 कर्मचारी अब भी संपर्क में नहीं हैं. इनमें 11 स्थायी और तीन अनुबंध कर्मचारी शामिल हैं.
वहीं मुख्य कस्टम प्रशासक राजेंद्र ढुंगाना सहित 25 कर्मचारियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है. लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है.
60 मकान बहे, पुल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के त्रिशूली बाजार के आसपास करीब 60 मकानों के बहने की जानकारी सामने आई है. दो मोटरेबल पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. देवीघाट क्षेत्र भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है.
बाढ़ से सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है.
पावर प्रोजेक्ट और सौर ऊर्जा संयंत्र को भी नुकसान
बाढ़ से त्रिशूली और देवीघाट पावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा 25 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र के तीन ब्लॉक और एक सबस्टेशन भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गए.
अचानक आए तेज जलप्रवाह ने कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को प्रभावित किया है.
पहले चेतावनी मिलने से टली बड़ी जनहानि
बाढ़ की शुरुआती चेतावनी मिलने के बाद त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले कई लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे. प्रशासन के अनुसार लोगों के समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाने से बड़े स्तर पर जनहानि को टाला जा सका.
ग्लेशियल झील फटने की आशंका की जांच
जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह बाढ़ भारी बारिश के कारण नहीं आई है. पिछले 24 घंटे में रसुवा में सात मिलीमीटर से भी कम बारिश दर्ज की गई.
ऐसे में अधिकारियों ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनदी झील के फटने से अचानक आई बाढ़ की आशंका को लेकर जांच शुरू कर दी है.
सेना और सुरक्षा एजेंसियां राहत-बचाव में जुटीं
नेपाल सरकार ने नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाली सेना और जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाने का निर्देश दिया है.
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी सरकारी निकायों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की अपील की है.
स्वास्थ्य सेवाओं को भी किया गया अलर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रभावित लोगों के लिए करीब एक हजार लोगों की जरूरत के अनुसार दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भेजने की तैयारी कर रहा है. इसके साथ 15 आपातकालीन टेंट भी भेजे जाएंगे.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 100 आपातकालीन बेड आरक्षित किए हैं. छह डॉक्टर और दो नर्सों को तैनात किया गया है. चिकित्सा सामग्री के साथ एक एंबुलेंस भी प्रभावित क्षेत्र के लिए भेजी गयी है.
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