बिहार के इस ऐतिहासिक स्थल की बदल जाएगी तस्वीर, सरकार ने दी करीब 20 करोड़ की सौगात

Bihar Tourism: केसरिया बौद्ध स्तूप और सीताकुंड धाम मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना में शामिल. 19.77 करोड़ से पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार.

Bihar Tourism: पूर्वी चंपारण को बिहार के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप और ऐतिहासिक-पौराणिक सीताकुंड धाम को बिहार सरकार की मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना और पर्यटन विकास योजनाओं में शामिल किया गया है. इससे इन दोनों पर्यटन स्थलों का विकास तेज होगा, वहीं स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनेगा केसरिया स्तूप

दुनिया के सबसे ऊंचे और विशाल बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप को लगभग 75 एकड़ क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. परियोजना के तहत करीब 19.77 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटकीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. यहां पर्यटकों के लिए कैफेटेरिया, टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर, पार्किंग सहित आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा आठ प्रमुख बौद्ध स्थलों की प्रतिकृतियां (रिप्लिका) भी बनाई जाएंगी, ताकि पर्यटकों को एक ही स्थान पर बौद्ध विरासत की झलक मिल सके.

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सीताकुंड धाम का भी होगा सौंदर्यीकरण

पर्यटन विभाग ने ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले सीताकुंड धाम के विकास के लिए भी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है. योजना के तहत यहां भव्य प्रवेश द्वार, विशाल मंदिर और अन्य आधारभूत पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

क्या है मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना?

मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है. इसके तहत पात्र लाभार्थी अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर सकेंगे. योजना के अनुसार प्रति कमरे 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी. अधिकतम चार कमरों तक कुल 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को 25 हजार रुपये प्रति कमरा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी.

5 किलोमीटर के दायरे के लोगों को मिलेगा लाभ

इस योजना का लाभ केवल उन घरों को मिलेगा, जो पर्यटन स्थलों से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं. सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही होटल, गाइड, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित सेवाओं में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे पूर्वी चंपारण की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

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Published by: Intejarul haq

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