Madhubani News : जिले के सभी एचडब्लूसी पर होगी टीबी स्क्रीनिंग व बलगम संग्रह की सुविधा

टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की समीक्षा बैठक शनिवार को जिला टीबी नियंत्रण इकाई के कार्यालय कक्ष में सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई.

मधुबनी. टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की समीक्षा बैठक शनिवार को जिला टीबी नियंत्रण इकाई के कार्यालय कक्ष में सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई. बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति एवं इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है. बैठक में जिले के सभी एचडब्लूसी पर टीबी स्क्रीनिंग व बलगम संग्रह की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया. बैठक में एसटीएस, एसटीएलएस एवं सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि शामिल थे. बैठक में टीबी के नए मामलों की संख्या, उपचार की दर और उपचार के परिणामों की समीक्षा की गयी. इसके साथ ही टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की. इसमें जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग और उपचार सेवाएं शामिल रही. बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए रणनीति पर चर्चा की गई. सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा कि जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान आरोग्य मंदिर ) पर टीबी स्क्रीनिंग व बलगम संग्रह की सुविधा उपलब्ध है. टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से सघन टीबी खोज अभियान की शुरुआत होगी. इसमें जन प्रतिनिधियों से भी टीबी मुक्त पंचायत बनाने में सहयोग करने की अपील की गई. सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से मई 2025 तक टीबी के 3326 मरीज चिह्नित किये गये. जनवरी से जून 2025 तक बढ़कर 3565 हो गया. इसमें प्राइवेट में 1658 एवं सरकारी संस्थानों में 1907 मरीज चिह्नित किया गया. जून माह में टीबी के 243 मरीज चिन्हित हुए, इसमें प्राइवेट में 3 सरकारी संस्थान में 229 मरीज चिन्हित किए गए हैं. इसमें एमडीआर के 11 मरीजों की पहचान की गई है. एमडीआर के मरीजों का उपचार 9 माह से 2 साल तक चलता है. सीडीओ ने बताया कि राज्य निर्देशानुसार प्रति 1000 पापुलेशन पर 30 लोगों का टीबी स्क्रीनिंग करना है. इसके लिए जिले के 16 प्रखंडों में ट्रूनट मशीन से टीबी की जांच की जाती है. जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण अधिकतर मरीजों द्वारा बीच में ही इलाज एवं नियमित रूप से दवा का सेवन करना छोड़ देना है. इसके लिए विभाग की ओर से निक्षय मित्र योजना की शुरुआत की गयी है. इस योजना के तहत मरीजों को गोद लिया जाता है.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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