मधुबनी. सदर अस्पताल सहित सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में सी-सेक्शन बढ़ाने के लिए सीएस डा हरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में अधीक्षक, उपाधीक्षक एवं चिकित्सा पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में सीएस ने सभी अनुमंडलीय अस्पताल प्रत्येक माह कम से कम 10 सी-सेक्शन करने का निर्देश दिया. साथ ही सदर अस्पताल में भी सी-सेक्सन बढ़ाने का निर्देश दिया. ताकि सिजेरियन प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी नर्सिंग होम में जाने से निजात मिल सके. एनेस्थेटिस्ट एवं सर्जन को हायर करने पर प्रति मरीज 2 हजार रुपए दी जाती है. बैठक में अनुमंडलीय अस्पतालों के प्रभारी उपाधीक्षक ने एनेस्थेटिस्ट नहीं रहने का मुद्दा उठाया. इस मामले में सीएस ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एनेस्थेटिस्ट एवं सर्जन को हायर कर निर्धारित लक्ष्य को हासिल करें. उन्होंने कहा कि सिजेरियन प्रसव के लिए ब्लड की आवश्यकता होती है. लिहाजा अनुमंडलीय अस्पतालमें के ब्लड स्टोर में हमेशा 5 यूनिट ब्लड रखने का निर्देश दिया. वहीं अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपट्टी में एक सप्ताह में ब्लड स्टोर यूनिट संचालित करने का निर्देश दिया. ताकि सिजेरियन प्रसव की शुरुआत हो सके. विदित हो कि वर्तमान में अनुमंडलीय अस्पतालों में प्रतिदिन 8-10 जेनरल प्रसव कराया जाता है. जबकि अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर को छोड़कर किसी अनुमंडलीय अस्पताल में सिजेरियन प्रसव नहीं किया जाता है. झंझारपुर में भी सिजेरियन प्रसव की खानापूरी की जा रही है. बैठक में सीएस ने सी-सेक्शन, एसएनसीयू में रेफर करने, एक्स -रे, अल्ट्रासाउंड, ओटी में आपरेशन करने सहित दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को भव्या पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया. ताकि अस्पताल की गतिविधियों का जिला से लेकर राज्य स्तर तक मूल्यांकन किया जा सके. बैठक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, एसीएमओ डॉ. एसएन झा, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह, अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन, सभी अनुमंडलीय प्रभारी उपाधीक्षक, बलड बैंक प्रभारी डॉ. कुणाल कौशल सहित कई चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित थे. सदर अस्पताल सहित सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में सी-सेक्शन बढ़ाने के लिए सीएस डा हरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में अधीक्षक, उपाधीक्षक एवं चिकित्सा पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में सीएस ने सभी अनुमंडलीय अस्पताल प्रत्येक माह कम से कम 10 सी-सेक्शन करने का निर्देश दिया. साथ ही सदर अस्पताल में भी सी-सेक्सन बढ़ाने का निर्देश दिया. ताकि सिजेरियन प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी नर्सिंग होम में जाने से निजात मिल सके. विदित हो कि एनेस्थेटिस्ट एवं सर्जन को हायर करने पर प्रति मरीज 2 हजार रुपए दी जाती है. बैठक में अनुमंडलीय अस्पतालों के प्रभारी उपाधीक्षक ने एनेस्थेटिस्ट नहीं रहने का मुद्दा उठाया. इस मामले में सीएस ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एनेस्थेटिस्ट एवं सर्जन को हायर कर निर्धारित लक्ष्य को हासिल करें. उन्होंने कहा कि सिजेरियन प्रसव के लिए ब्लड की आवश्यकता होती है. लिहाजा अनुमंडलीय अस्पतालमें के ब्लड स्टोर में हमेशा 5 यूनिट ब्लड रखने का निर्देश दिया. वहीं अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपट्टी में एक सप्ताह में ब्लड स्टोर यूनिट संचालित करने का निर्देश दिया. ताकि सिजेरियन प्रसव की शुरुआत हो सके. विदित हो कि वर्तमान में अनुमंडलीय अस्पतालों में प्रतिदिन 8-10 जेनरल प्रसव कराया जाता है. जबकि अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर को छोड़कर किसी अनुमंडलीय अस्पताल में सिजेरियन प्रसव नहीं किया जाता है. झंझारपुर में भी सिजेरियन प्रसव की खानापूरी की जा रही है. बैठक में सीएस ने सी-सेक्शन, एसएनसीयू में रेफर करने, एक्स -रे, अल्ट्रासाउंड, ओटी में आपरेशन करने सहित दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को भव्या पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया. ताकि अस्पताल की गतिविधियों का जिला से लेकर राज्य स्तर तक मूल्यांकन किया जा सके. बैठक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, एसीएमओ डॉ. एसएन झा, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह, अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन, सभी अनुमंडलीय प्रभारी उपाधीक्षक, बलड बैंक प्रभारी डॉ. कुणाल कौशल सहित कई चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
