मिथिला की कला को राष्ट्रीय मंच, निर्वाचन आयोग ने मांगी 50 मधुबनी पेंटिंग्स

मधुबनी की समृद्ध कला अब राष्ट्रीय मंच पर नजर आएगी. भारत निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक प्रयोजन के लिए 50 मधुबनी पेंटिंग्स मांगी हैं, जो स्थानीय कलाकारों को बड़ी पहचान दिलाएंगी.

मधुबनी: मधुबनी पेंटिंग की उपलब्धियों में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. मिथिला की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक अब भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय में भी देखने को मिलेगी. भारत निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक प्रयोजन के लिए मधुबनी चित्रकला संस्थान, मधुबनी से 50 मधुबनी पेंटिंग्स उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.

आयोग के इस कदम से स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा. साथ ही मधुबनी चित्रकला को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

पारंपरिक कला और विरासत को दर्शाने वाली पेंटिंग्स का चयन

भारत निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल अधिकारी की ओर से भेजे गये पत्र के माध्यम से इन पेंटिंग्स की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है. आयोग ने विशेष रूप से ऐसी पेंटिंग्स का चयन करने को कहा है, जिनमें मधुबनी की पारंपरिक कला, संस्कृति और समृद्ध विरासत की स्पष्ट झलक दिखाई देती हो.

इसका उद्देश्य आयोग के कार्यालय में मिथिला की विशिष्ट कला और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करना है.

स्थानीय कलाकारों को दी जायेगी प्राथमिकता

आयोग ने पेंटिंग्स की प्राप्ति में मधुबनी कला के संवर्धन और संरक्षण से जुड़े स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है.

इससे जिले के कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है. साथ ही स्थानीय कला और कलाकारों को आर्थिक एवं रचनात्मक प्रोत्साहन भी मिल सकेगा.

हर पेंटिंग के साथ अंग्रेजी में देना होगा विवरण

प्रत्येक पेंटिंग के साथ उसकी विषय-वस्तु और कलात्मक विशेषताओं का संक्षिप्त परिचय अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है. इससे आयोग के कार्यालय में प्रदर्शित होने वाली पेंटिंग्स के विषय और उनकी कला विशेषताओं को समझने में आसानी होगी.

पेंटिंग्स की आपूर्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित बिल या इनवॉइस के साथ की जायेगी.

मिथिला की कला को राष्ट्रीय पहचान का अवसर

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मधुबनी की पारंपरिक चित्रकला को आधिकारिक प्रयोजन के लिए चुना जाना मिथिला की सदियों पुरानी कला परंपरा के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है.

यह पहल स्थानीय कलाकारों की कला को व्यापक पहचान दिलाने के साथ मधुबनी चित्रकला की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को देशभर में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.

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