Madhubani News: जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत सुखेत पंचायत के विशौल गांव में विकास के दावों की पोल खुल गई है. यहाँ वार्ड चार में स्थित मुख्य सड़क पहली ही हल्की बारिश की मार नहीं झेल सकी और ढह कर सीधे तालाब में समा गई. चौंकाने वाली बात यह है कि इस सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण हुए अभी महज 12 दिन ही बीते थे.
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
विशौल गांव के बोया जी तालाब के पास किशौरी मंडल के घर से हनुमान मंदिर तक लगभग 100 मीटर सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो गई है. स्थानीय निवासी रमेश कुमार और अन्य ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर कड़े सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब के किनारे रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) नहीं बनाई गई और निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई. महज 12 दिन में सड़क का तालाब में समा जाना भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा कर रहा है.
आवागमन पूरी तरह प्रभावित
इस सड़क का निर्माण 24 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ था और 24 अप्रैल 2026 को कार्य संपन्न हुआ था. लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क के टूटने से इलाके का संपर्क कट गया है. भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि बाइक सवारों और पैदल यात्रियों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने विभाग की उदासीनता के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और सड़क की अविलंब मरम्मत की मांग की है.
मधुबनी के झंझारपुर से संजय कुमार की रिपोर्ट
