Madhubani News: बिहार के मधुबनी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जाने वाली सुविधाओं में पारदर्शिता लाने के लिए चलाया जा रहा फेस कैप्चरिंग और ई-केवाईसी (e-KYC) अभियान अब अपने अंतिम चरण में है. जिले के कुल 4.33 लाख लाभार्थियों में से करीब 3.94 लाख (90%) लोगों का डिजिटल सत्यापन पूरा हो चुका है.
फर्जीवाड़े पर ‘डिजिटल’ लगाम
आइसीडीएस (ICDS) की इस मुहिम से अब कागजों पर चल रहे ‘फर्जी लाभार्थियों’ का खेल खत्म हो जाएगा. फेस कैप्चरिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशन, पोषण सामग्री और टीकाकरण का लाभ केवल उन्हीं को मिले जो वास्तव में इसके हकदार हैं. डीपीओ डॉ. ललिता कुमारी ने बताया कि नेटवर्क की चुनौतियों के बावजूद सेविका-सहायिकाओं ने घर-घर जाकर इस लक्ष्य को हासिल किया है.
झंझारपुर ने मारी बाजी, 13 प्रखंड 90% के पार
जिले के 21 प्रखंडों में से 13 ने 90 प्रतिशत से अधिक का आंकड़ा पार कर लिया है। इसमें झंझारपुर प्रखंड 97.37% कार्य के साथ पूरे जिले में अव्वल रहा है. वहीं अंधराठाढ़ी, जयनगर और बाबूबरही में भी 93% से अधिक काम हो चुका है. दूसरी ओर, पिछड़ा प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों जैसे फुलपरास, लौकहा और लदनियां को विशेष अभियान चलाकर कार्य पूरा करने की चेतावनी दी गई है.
अब रिकॉर्ड होगा सुरक्षित
सत्यापन के बाद गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों का पूरा डेटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा. इससे योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावी होगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश शून्य हो जाएगी.
मधुबनी से रमण कुमार मिश्र की रिपोर्ट
