मधुबनी: पंडौल प्रखंड क्षेत्र के प्राचीन दुर्गा स्थान शाहपुर में आयोजित तीन दिवसीय मधुबनी नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ. रवि रंजन कुमार के निर्देशन में पहले सत्र में लोक नृत्य और लोकगीतों की विभिन्न प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया. कार्यक्रम आदर्श महिला मंडल लड्डूगामा की ओर से आयोजित तथा सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार की ओर से प्रायोजित था.
नेपाली झिझिया से राजस्थानी लोकगीत तक प्रस्तुति
कार्यक्रम में श्वेता, निशा और जान्हवी ने नेपाली झिझिया की सामूहिक प्रस्तुति दी. इसके बाद आदित्य, आलोक, जय, श्वेता, निशा और जान्हवी ने लाल साड़ी में सजकर ‘सजनी कमाल लगई छी’ पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया.
श्वेता, निशा और जान्हवी ने ‘एते के झुमका नई लेबई, दरभंगा से मंगा दिए’ की सामूहिक प्रस्तुति दी. वहीं राखी ने मिक्स लोकगीत ‘हमार दूल्हा हो, हमार दूल्हा’ पर एकल प्रस्तुति दी.
इसके बाद श्वेता, निशा, जान्हवी और प्राची ने मैथिली कजरी गीत ‘कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरी आइल ननदी’ प्रस्तुत किया.
सामा-चकेवा और झिझिया ने भी बांधा समां
कार्यक्रम में श्वेता, निशा और जान्हवी ने सामा-चकेवा गीत ‘गगन के अधिकारी तोहे बड़का भैया हो’ की प्रस्तुति दी. मिथिलांचल समूह के कलाकारों ने ‘मार मार के हो बलमा के हो’ पर एकल प्रस्तुति दी.
इसके बाद श्वेता, निशा और जान्हवी ने राजस्थानी लोकगीत ‘हम गोदाईब हो गोदानवा’ की प्रस्तुति दी. भोजपुरी ‘पातर झिझिया’ गीत ‘गनुआ शहरिया बीचे पातर झिझिया’ पर भी तीनों कलाकारों ने प्रस्तुति दी.
इसके अलावा ‘टिकवा जब जब मंगलिय रे, जट्टा टिकवा किये ना लोले रे’ पर श्वेता, निशा, जान्हवी, आदित्य, आलोक और जय ने जोड़ा नृत्य प्रस्तुत किया.
दूसरे सत्र में मंचित हुआ ‘विद्यापति’ नाटक
महोत्सव के दूसरे सत्र में डॉ इशनथा झा द्वारा लिखित नाटक ‘विद्यापति’ का मंचन किया गया. नाटक का रूपांतरण, परिकल्पना एवं निर्देशन रवि रंजन ने किया.
उद्घोषिका के रूप में शारदा झा ने मंच का संचालन किया. लोकगीत, लोक नृत्य और नाटक की प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में मिथिला की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली.
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