मधुबनी: रीजनल सेकेंडरी स्कूल में भारतीय भाषा समर कैंप संपन्न, बच्चों ने सीखी राजस्थानी भाषा

मधुबनी के रीजनल सेकेंडरी स्कूल में भारतीय भाषा समर कैंप-2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 800 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया. इस आठ दिवसीय शिविर का उद्देश्य छात्रों को भारतीय भाषाओं और उनकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था. बच्चों को राजस्थानी भाषा, कला और संस्कृति से विशेष रूप से परिचित कराया गया.

Madhubani News: शहर के रीजनल सेकेंडरी स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देश पर भारतीय भाषा समर कैंप-2026 का आयोजन 17 जुलाई से 24 जुलाई तक किया गया. आठ दिवसीय इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं और उनकी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था.

राजस्थानी भाषा और संस्कृति से कराया परिचय

विद्यालय के निदेशक डॉ. राम श्रृंगार पांडे ने बताया कि सीबीएसई के सर्कुलर के अनुसार विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को अपनी परिचित भाषा के अलावा किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसी उद्देश्य से समर कैंप में राजस्थानी भाषा का चयन किया गया, जिसमें बच्चों को उसकी बोलचाल, लेखन शैली, कला और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई.

भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर दिया गया जोर

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि सीबीएसई की यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं के प्रति विद्यार्थियों में समझ और सम्मान विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. इससे भारतीय भाषाओं के संरक्षण और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा मिलेगा.

विद्यालय के शैक्षणिक निदेशक इंजीनियर प्रत्यूष परिमल ने अपने संबोधन में राजस्थानी भाषा के इतिहास और उसकी समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला.

शिक्षकों और अभिभावकों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन के रूप में शिक्षिका वंदना कुमारी ने प्रशिक्षण दिया. वहीं अंशु कुमारी, श्वेता कुमारी, अनुपम कुमारी और शैलेंद्र पांडे ने सहयोगी के रूप में कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

समर कैंप में 800 विद्यार्थियों, 40 शिक्षक-शिक्षिकाओं और 300 अभिभावकों ने भाग लिया.


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By Raman kumar mishra

22 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. पॉजीटिव स्टोरी, चुनाव, बाढ़ और क्राइम सहित हर विधा की खबर लेखनी में निपुण हैं. जमीनी मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ के लिए जाने जाते हैं, जिसके तहत उनकी "वर्दीबास रेल खंड" एवं "गढ़गांव का दर्द" जैसी गंभीर सीरीज कई दिनों तक प्रमुखता से प्रकाशित हो चुकी हैं.

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