Madhubani News : हिंदी है हमारी संस्कृति और पहचान की धड़कन : अपर समाहर्ता

डीआरडीए के सभागार में रविवार को हिंदी विकास परिषद एवं जिला राजभाषा विभाग जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस मनाया गया.

मधुबनी. डीआरडीए के सभागार में रविवार को हिंदी विकास परिषद एवं जिला राजभाषा विभाग जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई. अध्यक्षता हिंदी विकास परिषद के अध्यक्ष पंडित राजेश रंजन पांडेय ने की. अपर समाहर्ता मुकेश रंजन, डीआरडीए निदेशक सैयद सरफराजुद्दीन, वरीय उपसमाहर्ता स्थापना कुमार आलोक, वरीय उप समाहर्ता वसीम कुमार निशांत, मेराज अहमद, साहित्यकार प्रो.जेपी सिंह, उदय जायसवाल, प्रीतम निषाद ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता मुकेश रंजन ने संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी हमारी एकता, संस्कृति और स्वाभिमान की भाषा है. उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों से आह्वान किया कि प्रशासन के कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें. ताकि जनता तक सीधा और प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सके. उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान की धड़कन है. अपर समाहर्ता ने कहा कि 14 सितंबर 1949 ई. में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला. देश में खान-पान, रहन- सहन सहित अनेक विविधताओं के बावजूद हिंदी भाषा सबको एक सूत्र में पिरोए हुए है. हम सभी की राष्ट्रभाषा हिंदी ही है. उन्होंने हिंदी विकास परिषद द्वारा प्रतिवर्ष जिला के साहित्यकारों को सम्मानित करने की परम्परा को बहुत अच्छी पहल बताया. कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार उदय जायसवाल ने किया. दो साहित्यकारों को किया गया सम्मानित हिंदी दिवस पर जिले के दो प्रख्यात साहित्यकारों को सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वालों में अर्द्धसैनिक बल से सेवानिवृत्त राजभाषा पदाधिकारी दयानंद झा एवं खाजेडीह कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राम दयाल यादव को हिंदी साहित्य और समाज में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया. अपर समाहर्ता ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया. कार्यक्रम में गूंजा हिंदी का संदेश कार्यक्रम में साहित्यकारों, अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह निराला ने संबोधित करते कहा कि हिंदी भाषा बोलने वालों की कुल संख्या लगभग 60 करोड़ से ऊपर है. यह अब वैश्विक भाषा हो गयी है. इसका लगतार विकास हो रहा है. ज्योति रमन झा ने कहा कि देश विदेश के लगभग 200 विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा की पढ़ाई हो रही है. 2025 में भारत मे हिंदी भाषा मे इंटरनेट देखने वालों की संख्या 60 करोड़ हो गया है. कार्यक्रम को प्रोफेसर जेपी सिंह प्रीतम निषाद, उदय जायसवाल, प्रोफेसर लाल बाबू शाह, वेदानंद शाह, राजेंद्र पासवान, डॉ. विजय शंकर पासवान, रीना यादव, राजेद्र यादव, अनुपम झा, अधिवक्ता ऋषि देव सिंह, डॉ. विनय विश्वबंधु, ध्रुव नारायण त्रिपाठी सहित कई साहित्यकारों ने संबोधित किया.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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