मधुबनी.
गर्मी का मौसम आते ही स्वास्थ्य विभाग इंसेफेलाइटिस बीमारी को लेकर अलर्ट मोड में है. इस बीमारी से निपटने के लिए एसीएस प्रत्यय अमृत व इडी सुहर्ष भगत ने डीएम, सीएस सहित स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है. एसीएस के निर्देश के आलोक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने सदर अस्पताल के अधीक्षक सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. जिसको लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है. सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को दवा उपलब्ध करा दी गई है. ताकि गर्मी के मौसम में एइएस व जेई से ग्रस्त बच्चों को स्वास्थ्य संस्थानों में तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा सके. राहत की बात यह है कि अभी तक जिले में कहीं से भी इंसेफेलाइटिस (चमकी) बीमारी से प्रभावित एक भी बच्चों को चिन्हित नहीं किया गया है. सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू एवं इमरजेंसी में चमकी की दवा उपलब्ध करा दी गई है. बच्चा वार्ड की साफ-सफाई कर दी गई है.क्या है ”चमकी” बुखार
एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम को बोलचाल की भाषा में चमकी बुखार कहते हैं. इस रोग से ग्रस्त रोगी का शरीर अचानक सख्त हो जाता है और मस्तिष्क व शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है. आम भाषा में इसी ऐंठन को चमकी कहा जाता है. इंसेफ्लाइटिस मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती है. जिसकी वजह से शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते हैं. लेकिन जब इन कोशिकाओं में सूजन आ जाती है तो उस स्थिति को एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है. यह एक संक्रामक बीमारी है. इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर प्रजनन शुरू कर देते हैं. शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर यह खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाता है. मस्तिष्क में पहुंचने पर यह वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं. जिसकी वजह से शरीर का ”सेंट्रल नर्वस सिस्टम” खराब हो जाता है. सिविल सर्जन ने कहा कि लक्षण के अनुसार इस बीमारी का उपचार किया जाता है. बुखार आने पर बुखार की दवा एवं चमकी आने उसे रोकने की दवा व डिहाइड्रेशन के लिए आइबी फ्लूइड चलाया जाता है. उन्होंने कहा कि बच्चों को पेड़ से गिरे हुए कोई भी फल नहीं खाना चाहिए. इससे वायरस के संक्रमण का खतरा अधिक होता है. उन्होंने कहा कि तेज बुखार के साथ चमकी आती है. जितना तेज चमकी होता है मरीज का दिमाग उतनी जल्दी डैमेज होता है. जिसके कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है.
अप्रैल से जुलाई महीनों तक होते हैं ज्यादातर मामले
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि गर्मी में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है. इस समय में एक्युटी इंसेफेलाइटिस एवं जैपनीज इंसेफेलाइटिस बुखार के साथ चमकी होने की संभावना बनी रहती है. सीएस ने कहा कि अप्रैल से जुलाई महीने में छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में चमकी बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. उन्होंने कहा कि बच्चों में चमकी के लक्षण दिखाई दे तो बिना विलंब किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं. अस्पताल से दूरी होने पर सरकारी या निजी एंबुलेंस लेकर पहुंचे. जिसका भाड़ा संबंधित अस्पताल से दिया जाएगा.
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