मधुबनी
. जिलेभर में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. इस अवसर पर सरकारी एवं निजी विद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को सम्मानित किया और उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया. आधुनिक युग में जब तकनीक का दायरा बढ़ रहा है, तब शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. वह केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं. उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक अंकित कुमार ने कहा कि तेज़ी से विकसित हो रहे डिजिटल युग में, तकनीक के उदय के कारण शिक्षा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं. पारंपरिक कक्षाओं का पूरक बनकर और कुछ मामलों में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और आभासी शिक्षण वातावरण ने उनका स्थान ले लिया है. शिक्षा में तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के बावजूद, शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है. आज के डिजिटल शिक्षा युग में शिक्षक न केवल ज्ञान के संवाहक हैं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरक भी हैं. सीखने के अनुभव को आकार देने और यह सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है कि छात्र तकनीक-संचालित दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करें.शिक्षा का बदल रहा परिदृश्य
डिजिटल युग ने सूचना और शिक्षण संसाधनों तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान की है. एक बटन के क्लिक से छात्र ऑनलाइन ट्यूटोरियल, शोध लेख और यहां तक कि पूरे पाठ्यक्रम तक पहुंच सकते हैं. जिससे ज्ञान पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गया है. लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, वर्चुअल क्लास रूम और शैक्षिक एप जैसे डिजिटल उपकरण अधिक व्यक्तिगत और लचीले शिक्षण अनुभव की अनुमति दे रहे हैं. लेकिन यह शिक्षकों द्वारा प्रदान किए जाने वाले मानवीय तत्व की जगह नहीं ले सकती.ऑनलाइन शिक्षा ने बदली तस्वीर
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन क्लास ने शिक्षकों के लिए नई चुनौतियां खड़ी की. तकनीकी ज्ञान के बिना पढ़ाना लगभग असंभव सा हो गया था. एनसीइआरटी की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 तक देश के 80 प्रतिशत शिक्षकों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रेनिंग प्राप्त की.
पारंपरिक अध्यापन से तकनीकी शिक्षण तक बदली तस्वीर
पहले शिक्षक केवल ब्लैकबोर्ड और किताबों पर निर्भर रहते थे. लेकिन अब स्मार्ट बोर्ड, वीडियो लेक्चर और डिजिटल कंटेंट शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. शिक्षक अब सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं. डिजिटल युग में शिक्षक का काम केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को तकनीक का सही उपयोग सिखाना भी है.75 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा शुरू
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत शिक्षकों को तकनीकी कौशल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी जरूरी है. ताकि शिक्षा केवल तकनीकी न होकर सर्वांगीण विकास का माध्यम बने.
संवादात्मक, सहयोगात्मक और छात्र-केंद्रित है शिक्षा
आज की शिक्षा अधिक संवादात्मक, सहयोगात्मक और छात्र-केंद्रित है. शिक्षक-केंद्रित शिक्षा जहां शिक्षक ही ज्ञान का एकमात्र स्रोत होता है. शिक्षक अब केवल ज्ञान प्रदाता नहीं हैं; वह सुविधा प्रदाता भी हैं, जो छात्रों को सूचना और संसाधनों के विशाल डिजिटल परिदृश्य में नेविगेट करने में मदद करते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
