नलकूप खराब, नदियों में पानी नहीं

रबी फसल के आते ही सरकार से लेकर विभाग तक किसान हित की बात व अनुदान पर यंत्र व उपादान वितरण किये जाने की पहल शुरू कर दी गयी है. पर इस सब के बाद भी किसानों को पटवन की चिंता सता रही है. दरअसल जिले में कहीं भी सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है. […]

रबी फसल के आते ही सरकार से लेकर विभाग तक किसान हित की बात व अनुदान पर यंत्र व उपादान वितरण किये जाने की पहल शुरू कर दी गयी है. पर इस सब के बाद भी किसानों को पटवन की चिंता सता रही है. दरअसल जिले में कहीं भी सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है. कुछ किसानों को छोड़ दें तो आज भी जिले के अधिकांश किसान बारिश के पानी के भरोसे ही अपनी खेती कर रहे हैं. जिस साल समय – समय पर बारिश हुई उस साल बेहतर उपज भी होती है. यदि बारिश नहीं हुई तो उपज प्रभावित होना स्वाभाविक है. जिले के अधिकांश सरकारी नलकूप खराब हो चुका है. नदियों में पानी नहीं है. तालाबों से पानी लेने में परेशानी होती है. ऐसे में किसान के सामने फसल में समय से सिंचाई नहीं होने की चिंता सता रही है.
334 हेक्टेयर खेत में ही हुई थी सिंचाई . पिछले रबी फसल में 90 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती की गयी थी. पर इसमें से मात्र 334 हेक्टेयर में ही पूरे जिले में नलकूप से सिंचाई उपलब्ध हो सका था. यही हाल इस साल भी होने की संभावना है.
चालक नहीं रहने से हो रहा काम बाधित. कार्यपालक अभियंता अनिरुद्ध प्रसाद ने बताया कि नलकूप खराब रहने के कारण पटवन में परेशानी होती है. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि बोरिंग की संख्या के अनुसार चालक नहीं रहने के कारण भी काम बाधित हो रहा है.
एक चालक के जिम्मे 8 से 10 बोरिंग का प्रभार है. बताया कि ज्वाइंट फाल्ट के कारण जितना नलकूप बंद है. इसको चालू कराने के लिए पांच माह पूर्व सरकार को प्राक्कलन बना कर भेजी जा चुकी है. लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं होने के कारण काम चालू नहीं किया गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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