मधुबनी : जले ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के लिए नार्थ बिहार पावर कंपनी द्वारा सब डिवीजन कार्यालय में टीआरडब्ल्यू यूनिट खोला गया. पर टीआरडब्ल्यू यूनिट के दो साल हो जाने के बाद भी यहां पर एक भी ट्रांसफॉर्मर का मरम्मती नहीं हो पायी है. अब भी यहां के खराब होने वाले ट्रांसफॉर्मर की मरम्मति के लिये दूसरे जिले पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
दो साल में भी ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत शुरू नहीं
मधुबनी : जले ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के लिए नार्थ बिहार पावर कंपनी द्वारा सब डिवीजन कार्यालय में टीआरडब्ल्यू यूनिट खोला गया. पर टीआरडब्ल्यू यूनिट के दो साल हो जाने के बाद भी यहां पर एक भी ट्रांसफॉर्मर का मरम्मती नहीं हो पायी है. अब भी यहां के खराब होने वाले ट्रांसफॉर्मर की मरम्मति के लिये […]

नौ लाख की मशीन का उपयोग नहीं . ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के लिये लगाये गये नौ लाख की मशीन आज बेकार होकर रखा है. इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है. टीआरडब्ल्यू के स्टोर कीपर मनोज कुमार ने बताया कि यहां पर 63, 100 और 200 केवीए का ट्रांसफॉर्मर की मरम्मती होना था . लेकिन विभाग द्वारा तकनीशियन एवं कनीय अभियंता का पदस्थापन नहीं किया गया. जिस कारण यहां पर काम शुरू नहीं हो रहा है. विभाग द्वारा क्वाइल, वैंडिग मशीन हिटींग चेंबर एवं आयल फिल्ट्रेशन मशीन लगाया गया. इन मशीनों पर कंपनी को लगभग नौ लाख रुपया खर्च हुआ. पर यह शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.
दरभंगा में होती है रिपेयरिंग
मधुबनी जिला में जितना ट्रांसफॉर्मर खराब होता है. उसको मरम्मती के लिए दरभंगा भेजा जाता है. एक ट्रांसफॉर्मर की मरम्मती के लिए विभाग को लगभग 1200 रुपया खर्च होता है.
साथ ही चार से पांच दिन समय बर्बाद भी होता है. टीआरडब्ल्यू के सहायक अभियंता गौरव कुमार ने बताया कि टीआरडब्ल्यू के सहायक अभियंता गौरव कुमार ने बताया कि टीआरडब्ल्यू विभाग में जनवरी से काम
शुरू कर दी जायेगी. उक्त विभाग में जल्द ही तकनीशियन व जेई का पदस्थापन हो जायेगा.
दो साल पूर्व लगी थी खराब ट्रांसफॉर्मर को ठीक करने की यूनिट
अब भी दरभंगा ही भेजा जाता है ठीक करने के लिए ट्रांसफॉर्मर