ध्वस्त होने के कगार पर है बुनकरों का शेड बेरोजगारों का महानगरों को पलायन विफल हुई महत्वाकांक्षी योजना सरकारी योजना की खुली पोल फोटो- 1परिचय- ध्वस्त होने के कगार पर पहुंचा बुनकर वर्कशेड कॉमन इंट्रो सरकार योजनाएं तो बनाती है पर इसे सरजमीन पर उतारने में विफल हो जाती है. इसी तरह का एक मामला है शहर में. यहां बुनकरों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिये विशाल शेड का निर्माण लाखों रुपये की लागत से हुई पर इसमें न तो हस्तकरघा लगा न बुनकरों के उपयोग के लायक कोई अन्य मशीन. खादी ग्रामोघेग के मृतप्राय होने के बाद बुनकरों को इस वर्कशेड की सरकारी योजना से काफी उम्मीदें थी जो समय के साथ ध्वस्त हो गई. मधुबनी जिले के बुनकरों के अरमान सदर अस्पताल के समीप बने वर्कशेड में दफन हो रहा है. पिछले लगभग दस साल से इस विशाल हॉल जैसे भवन की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. लाखों रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण बुनकरों को हस्तकरघा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने के लिये किया गया था. पर इसका कोई उपयोग नहीं हो सका. जिसके कारण यह भवन जर्जर हो गया है. भवन जगह जगह क्षतिग्रस्त हो गया है. इसके परिसर का काम आसपास के लोगों का पुआल रखने के काम आ रहा है. बेरोजगार हैं बुनकर शहर में और आसपास के गांवों में बुनकरों की संख्या हजारों में है. यहां आजादी के बाद बुनकर समुदाय के शफिकुल्ला अंसारी,हन्नान अंसारी सांसद बने पर बुनकरों की तकदीर नहीं संवर सकी. सरकार भी बुनकरों के कल्याण के लिये कई योजनाएं लागू करती रही. पर बुनकरों के जीवन में अंधेरा छाया रहा. नहीं लग सका मशीन भवन बनने के लगभग 15 साल बाद भी सदर अस्पताल के समीप बने विशाल वर्कशेड में हस्तकरघा मशीन को नहीं लगाया गया. जिससे बुनकर रोजगार के लिये तरसते रहे. भवन को उपेक्षित हाल में छोड़ दिया गया. जिससे इसकी दशा और भी दयनीय हो गयी. जिस वर्कशेड से बुनकरों की तकदीर संवर सकती थी वह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. कोई इसकी सुधि नहीं ले रहा है. कर गये पलायन समीप के हजारों बुनकर रोजगार के अभाव में महानगरों को पलायन कर गये पर इस बुनकर शेड की हाल जानने कोई भी अधिकारी ने कोशिश नहीं की. हालत यह है कि अभी भी यह भवन सरकारी दावे की पोल खोल रहा है. कोई बुनकर नेता इस वर्कशेड के जीर्णोद्धार के लिये आवाज बुलंद नहीं कर रहा है. अतिक्रमण की आशंकाउपेक्षित रहने के कारण वर्कशेड परिसर के अतिक्रमण की आशंका बढती जा रही है. कोई इसके परिसर में पुआल रख रहा है तो कोई इसके दीवाल पर उपले सुखा रहा है. कभी कभी तो आसपास के युवक इस वर्कशेड के समीप जुआ खेलते नजर आते हैं. असामाजिक तत्वों का चारागाह बनता जा रहा है शहर का यह बुनकर वर्कशेड. उम्मीदों पर वज्रपात लाखों रुपये की लागत से बने इस वर्कशेड के बनने से बुनकरों में आशा की किरण जगी थी कि वहां हस्तकरघा मशीन लगेगी जिससे स्थानीय बुनकरों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. पर यह सपना हकीकत में तब्दील नहीं हो सका. थक हार कर आसपास के बुनकरों ने उम्मीद का दामन छोड़ा व रोजगार की तलाश में महानगरों को पलायन कर गये. क्या कहते हैं अधिकारी जिला उद्योग केंद्र के प्रबंधक शत्रुघ्न प्रसाद सिंह का कहना है कि वे इसकी समीक्षा करेंगे. समीक्षा के बाद इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जायेगी जिससे बुनकरों को इस वर्कशेड का लाभ मिल सके.
ध्वस्त होने के कगार पर है बुनकरों का शेड
ध्वस्त होने के कगार पर है बुनकरों का शेड बेरोजगारों का महानगरों को पलायन विफल हुई महत्वाकांक्षी योजना सरकारी योजना की खुली पोल फोटो- 1परिचय- ध्वस्त होने के कगार पर पहुंचा बुनकर वर्कशेड कॉमन इंट्रो सरकार योजनाएं तो बनाती है पर इसे सरजमीन पर उतारने में विफल हो जाती है. इसी तरह का एक मामला […]
