सरजी बोले, हड़ताल है घर जाओ

मधुबनी/साहरघाट : नियोजित शिक्षकों के हड़ताल से जिले के अधिकांश प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित है. बच्चों हर सुबह पढ़ाई होने की उम्मीद में स्कूल तो आते हैं, लेकिन उन्हें हर दिन निराशा ही हाथ लग रही है. अब इससे खासकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. जिले में 8.50 लाख छात्र-छात्रएं […]

मधुबनी/साहरघाट : नियोजित शिक्षकों के हड़ताल से जिले के अधिकांश प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित है. बच्चों हर सुबह पढ़ाई होने की उम्मीद में स्कूल तो आते हैं, लेकिन उन्हें हर दिन निराशा ही हाथ लग रही है. अब इससे खासकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
जिले में 8.50 लाख छात्र-छात्रएं नामांकित हैं. इनमें 5.72 लाख छात्र-छात्राओं की औसत उपस्थिति रहती है, जिनकी पढ़ाई बाधित है. बुधवार को भी यही हाल देखने को मिला. बच्चों का स्कूल से लौटने का सिलसिला जारी रहा. ऐसे अधिकांश ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला. कई जगहों पर तो बच्चे स्कूल खेलते नजर आये.
तो कुछ जगहों पर गेट बंद रहने के कारण बैरंग लौटने को मजबूर होना पड़ा. उत्क्रमित मध्य विद्यालय डिहबार में सुबह करीब 9.30 बजे दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को खेलते पाया गया. पूछने पर एक छात्र सुनीता कहती है सर जी नहीं आये तो हम लोग खेल रहे हैं.
वहीं, दिन के करीब 10 बजे राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुजातपुर में बच्चे स्कूल के बंद गेट के सामने सड़क को ही खेल मैदान बना दिया था. छात्र रविरंजन कुमार, प्रियंका, अल्का, धर्मपाल, राकेश, रोहित, सुरेश, पुरुषोत्तम, आशा, मनीषा व राजा सहित अन्य बच्चों ने बताया कि हम हर रोज विद्यालय जाते हैं, लेकिन सब दिन मास्टर साहब कहते हैं जाओ आज हड़ताल है कल आना. मध्य विद्यालय बसबरिया में भी कुछ यही हाल देखा गया.
अभिभावकों में गुस्सा
हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई होने से अब अभिभावकों में भी गुस्सा पनपने लगा है. डिहबार के एक अभिभावक विपत सहनी कहते हैं कि हमलोग गरीब हैं. इसी मजबूरी में अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण काफी पढ़ाई बाधित हो रही है.
इससे बच्चे का भविष्य खराब हो रहा है. वहीं, सुजातपुर के मंगल ठाकुर बताते हैं कि यहां के स्कूल में पठन-पाठन पूरी तरह से नियोजित शिक्षक पर निर्भर है. इस हड़ताल से छात्र-छात्रों का भविष्य बरबाद हो रहा है.
अब तो अभिभावकों को भी पढ़ाई के लिए सड़क पर उतरना चाहिए. बसबरिया के रामसुदिष्ट साह कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई बाधित कर कौन सा आंदोलन हो सकता है कि इनका भविष्य ही बरबाद हो जाये. सरकार को इस मामले में कोई ठोस कदम उठाना चाहिए.

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