निर्मली (सुपौल) : नेपाल में संविधान लागू होने की अनिश्चितता को लेकर 32 दलों का संयुक्त रूप से तीन दिन की बंदी रखी गयी है. इसको लेकर भारतीय मूल के सीमावर्ती बाजार 90 प्रतिशत प्रभावित हुआ है. वहीं, नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) ने संघीयता, शासकीय स्वरूप एवं सर्वोच्चय न्यायालय के फैसले के विरुद्ध इस बंदी को समर्थन दिया है.
आम लोगों की माने तो संविधान बनकर लागू होने की तिथि में लगातार परिवर्तन होने से आम जनों का गुस्सा फुट कर सड़क पर आ चुका है. हरिपुर के स्थानीय निवासी सरयुग सरदार बताते हैं कि माघ दस गते को ही संविधान लागू होने की अंतिम तिथि घोषित की गयी थी, लेकिन ससमय संबिधान लागू नहीं होने से नेपाल अधिराज्य भर की जनता आक्रोशित है.
जो बंदी का मुख्य स्वरूप है. नेकपा माले की बातोंपर यदि अमल न किया गया तो यह बंदी अनिश्चितकालीन में बदल सकती है. जानकारी देते हुए हरिपुर बॉर्डर ऑट पोस्ट भंटाबारी (सुनसरी नेपाल) के इंस्पेक्टर जगत बहादुर ने बताया कि दूध, मछली, एंबुलेंस की गाड़ी के साथ दो पहिये के वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग होकर आ-जा रही है. प्रशासन की चौकसी पूरे अधिराज भर में है.
हर चौराहे पर नजर रखी गयी है. ताकि कहीं से कोई अप्रिय घटना व हताहत न हो सके. वहीं नेपाल की इस बंदी से भारत-नेपाल सीमा के बाजार, यातायात व जन जीवन प्रभावित है.
सामान्य दिनों में भारत-नेपाल सीमा के कुनौली, बाजार भीमनगर, वीरपुर, बसमतिया में आवागमन तथा दुकानों में काफी भीड़-भाड़ देखी जाती थी. लेकिन नेपाल बंदी को लेकर मंगलवार को इन बाजारों में चहल पहल शून्य दिखे.
कुनौली व्यापार संघ के राधेश्याम उर्फ गोपाल गुप्ता, भीमनगर व्यापार संघ के अध्यक्ष रामप्रवेश सिंह व अंबे वस्त्रलय के संचालक सुरेश पौदार ने बताया कि स्थानीय बाजार नेपाल के बलबुते आधारित है. बंदी से स्थानीय बाजार 90 प्रतिशत प्रभावित हुआ है.
