चार साल में 411 बीपीएल छात्रों का नामांकन

उदासीनता : जिले के निजी स्कूल प्रबंधक कर रहे सरकारी निर्देश की अनदेखी मधुबनी : जिले के मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत अभिवंचित व कमजोर वर्ग के छात्र-छात्रओं का नामांकन नहीं हो रहा है. यहां सरकार के निर्देश की अनदेखी हो रही है. आंकड़े बयां कर रहे हैं कि किसी भी विद्यालय प्रबंधन […]

उदासीनता : जिले के निजी स्कूल प्रबंधक कर रहे सरकारी निर्देश की अनदेखी
मधुबनी : जिले के मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत अभिवंचित व कमजोर वर्ग के छात्र-छात्रओं का नामांकन नहीं हो रहा है. यहां सरकार के निर्देश की अनदेखी हो रही है. आंकड़े बयां कर रहे हैं कि किसी भी विद्यालय प्रबंधन ने इस नियम पर काम नहीं किया है. नतीजा है कि विगत चार साल में जिले भर में मात्र 411 बीपीएल परिवार के बच्चों क ा नामांकन ही इन निजी विद्यालयों में हो सका है.
सरकार ने गरीब परिवार के बच्चों का निजी विद्यालय में पढ़ने व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त के सपना को पूरा करने के लिए यह नियम बनाया, लेकिन इस नियम का पालन नहीं हो सका है. योजना के अनुसार सरकार इसके लिये राशि उपलब्ध करायेगी. जिसके तहत सरकार प्रति छात्र-छात्र 4311 रुपये प्रदान करेगी.
स्वीकृति राशि की निकासी डीपीओ लेखा योजना के द्वारा निजी विद्यालय के प्राचार्य से प्राप्त प्री रिसिप्ट के आधार पर की जायेगी. राशि की निकासी कर निजी विद्यालयों को राशि दी जायेगी. पिछली राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रस्वीकृत निजी विद्यालयों में कमजोर व अभिवंचित समूह के नामांकित बच्चों की संख्या के अनुपात में राशि निजी विद्यालय को बैंक खाता के माध्यम से प्रतिपूर्ति की जायेगी. विद्यालय द्वारा इसके लिये अलग से बैंक खाता संधारित किया जायेगा.
जिले में नगण्य रहा नामांकन
जिले में वर्ष 2011 से 2014 तक मात्र 411 बीपीएल बच्चों का ही नामांकन निजी विद्यालयों में हो सका. इसके तहत वर्ष 2011 में 34 बच्चों का ही नामांकन मान्यता प्राप्त स्कूलों में हो सका. जबकि वर्ष 2012 में 67 बच्चों का नामांकन हुुआ. वर्ष 2013 में 70. 2014 में 240 बच्चों का नामांकन हुआ. इस तरह जिले में सिर्फ 411 कमजोर एवं अभिवंचित समूह के बच्चों का ही नामांकन हुआ.
92 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय
विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 92 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय हैं. इसमें करीब चार लाख छात्र-छात्रएं नामांकित हैं. नियम के अनुसार यदि इसका 25 फीसदी बीपीएल परिवारों के बच्चों का नामांकन कराया जाय तो भी कम से कम 1 लाख बीपीएल बच्चों का नामांकन निजी विद्यालयों में होना चाहिये था. पर आंकड़े बता रहे है कि मात्र तीन साल में मात्र 171 छात्रों का ही नामांकन हो सका.
विभाग पर सवाल
जिले में निजी विद्यालयों में बीपीएल परिवारों के बच्चों का नामांकन नहीं हो सका. इससे विभाग या जिला प्रशासन पूरी तरह वाकिफ है. पर इसे विभाग की उदासीनता कहें या फिर मिलीभगत कि इस दिशा में कभी भी किसी विद्यालय में कोई पहल नहीं किया गया. नतीजा है कि जिला मुख्यालय तक में किसी भी विद्यालय में शिक्षा विभाग के इस निर्देश का पालन नहीं हो सका है. और विभाग हाथ पर हाथ धड़े बैठी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीपीओ प्रारंभिक शिक्षा व सर्वशिक्षा अभियान हरि नारायण झा का कहना है कि शिक्षा का अधिकार कानून अंतर्गत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत कमजोर व अभिवंचित वर्ग के बच्चों का नामांकन कराने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीट अभिवंचित व कमजोर वर्ग के बच्चों को मिलेगा.

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