मधुआ रोग से आम की फसल बरबाद

बसैठ : बेनीपट्टी प्रखंड क्षेत्र के आम के बगीचों में बड़े पैमाने पर आम के मंजर देख किसान काफी उत्साहित थे, लेकिन मंजर में व्यापक मात्र में मधुआ रोग के प्रकोप होने के कारण अब अधिकांश आम के पेड़ों में मंजर के स्थान पर महज डंटल बच गये हैं. फलत: किसान समुदाय हतोत्साहित हो उठे […]

बसैठ : बेनीपट्टी प्रखंड क्षेत्र के आम के बगीचों में बड़े पैमाने पर आम के मंजर देख किसान काफी उत्साहित थे, लेकिन मंजर में व्यापक मात्र में मधुआ रोग के प्रकोप होने के कारण अब अधिकांश आम के पेड़ों में मंजर के स्थान पर महज डंटल बच गये हैं. फलत: किसान समुदाय हतोत्साहित हो उठे हैं.
किसानों ने मंजर को बचाने के लिए दो से तीन बार दवा का छिड़काव भी किया था, लेकिन बाजारों में नकली दवा की व्यापकता के कारण परिणाम ढाक के तीन पात साबित हुआ है.
किसान बासुकी झा, मुनचून झा व मो हसनैन सहित अन्य ने बताया कि बाजार से खरीद कर अब तक तीन बार दवा का छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन मंजर झड़ने का सिलसिला अनवरत जारी है. किसानों ने बताया कि इस वर्ष शुरू से ही मौसम आम के फसल के अनुकूल नहीं है. बीते दिन आए बेमौसम आंधी व बरसात से भी आम के फसलों को काफी नुकसान हुआ है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मंगलानंद झा ने बताया कि मंजर को मधुआ रोग से बचाने के लिए प्रमाणित कीटनाशक सैमीन, 10 लीटर पानी में दो ग्राम की मात्र से छिड़काव करना चाहिए. दूसरी बार जब आम मटर के आकार का हो जाये तो रॉगर आठ मिली दवा 10 लीटर पानी में मिला कर समुचित छिड़काव करना चाहिए. वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी कि दवा खरीदते समय दुकानदारों से रसीद अवश्य लें, ताकि नकली कीटनाशक बेचने वालों पर कार्रवाई की जा सके.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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