कार्यालयों में बैठने तक की व्यवस्था नहीं

मधुबनी : सरकार के महत्वाकांक्षी लोक संवेदना अभियान का अनुपालन जिले में सही ढंग से नहीं हो पाया है. सरकारी कार्यालयों में इस अभियान को सुचारु ढंग से चलाने के लिए कोई पहल नहीं जा रही है. अधिकांश सरकारी कार्यालयों में जनता के साथ उचित व्यवहार नहीं करने की बातें अभी भी सामने आ रही […]

मधुबनी : सरकार के महत्वाकांक्षी लोक संवेदना अभियान का अनुपालन जिले में सही ढंग से नहीं हो पाया है. सरकारी कार्यालयों में इस अभियान को सुचारु ढंग से चलाने के लिए कोई पहल नहीं जा रही है. अधिकांश सरकारी कार्यालयों में जनता के साथ उचित व्यवहार नहीं करने की बातें अभी भी सामने आ रही है.
क्या है लोक संवेदना अभियान
सरकार ने लोक सेवकों और जनता व जनप्रतिनिधि के बीच आचार व व्यवहार में सामंजन को लेकर ही लोक संवेदना अभियान शुरू की है, ताकि सरकारी दफ्तरों में जनप्रतिनिधियों व जनता को लोक सेवकों की उपेक्षा व समस्या का सामना न करना पड़े.
इसके तहत सभी सरकारी कर्मी के व्यवहार में जन प्रतिनिधियों, वृद्ध, महिला, नि:शक्त एवं समाज के वंचित वर्ग के व्यक्तियों जनसाधारण के प्रति संवेदनशील होने, आंगतुकों के लिए आवश्यक जन सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया.
अभियान के उद्देश्य
लोक संवेदना का उद्देश्य सरकारी कर्मियों के व्यवहार में संवेदनशीलता लाना है, ताकि वे जन प्रतिनिधियों एवं सामान्य जनों के साथ सम्मान पूर्वक व्यवहार करें. साथ ही सरकारी कार्यालय में आने वाले आगंतुकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवायें, जिससे उनका अनुभव सुखकर हो सके.
क्या हैं कार्यालयों की स्थिति
लोक संवेदना के तहत अधिकारियों एवं कर्मियों की ओर से अब तक इन कार्यो की शुरुआत नहीं के बराबर ही हो पायी है. हालांकि अधिकारियों का मानना हैं कि लोक संवेदना के तहतआगंतुकों के साथ अब अच्छा व्यवहार किया जा रहा है.
संसाधन की है कमी
सरकारी कार्यालयों की बात करें तो जिला पदाधिकारी कार्यालय कक्ष अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय कक्ष एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय को छोड़कर अन्य सरकारी विभागों में संसाधन की घोर कमी है. न तो बैठने के लिए कुरसी की व्यवस्था है न ही पानी की व्यवस्था, कई कार्यालय में तो सूचना पट्ट का भी अभाव दिखता है.

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