मधुबनी : शहर में अन्य दिनों की अपेक्षा करीब चौदह हजार अधिक लोगों का दबाव पड़ा तो शहर का हर चौक चौराहा हांफने लगा. कहीं भी जगह नहीं बचा जहां जाम नहीं रहा. लोग जाम में फंसे तो फिर घंटो नहीं निकल सके. मिनटों की दूरी घंटों में तय की गयी. ऐसा नहीं कि यह दबाव अचानक ही बढा. प्रशासन को इस भीड़ की जानकारी पूर्व में थी, पर जैसा कि हर ऐसे अवसर पर प्रशासन जनता को भगवान भरोसे छोड़ देती है, इस बार भी प्रशासन ने ऐसा ही किया. दरअसल मंगलवार को एसटीईटी की परीक्षा शहर के दस केंद्रों पर संचालित की गयी. जिसमें करीब 8500 छात्र के अलावे छह हजार अभिभावक भी शहर में आ गये.
लोगों का बढ़ा दबाव, तो हांफने लगा ट्रैफिक
मधुबनी : शहर में अन्य दिनों की अपेक्षा करीब चौदह हजार अधिक लोगों का दबाव पड़ा तो शहर का हर चौक चौराहा हांफने लगा. कहीं भी जगह नहीं बचा जहां जाम नहीं रहा. लोग जाम में फंसे तो फिर घंटो नहीं निकल सके. मिनटों की दूरी घंटों में तय की गयी. ऐसा नहीं कि यह […]

वाहनों की संख्या भी इसी के अनुसार बढा. पर इससे शहर में जाम की स्थित उत्पन्न हो सकती है इससे जिला ट्रैफिक पुलिस व पुलिस प्रशासन या तो अनभिज्ञ बनी रही या फिर जानबूझ कर लोगों को जाम में रेंगने के लिये छोड़ दिया. नतीजा यह रहा कि दिन भर लोग हलकान होते रहे. सबसे अधिक परेशानी सुबह आठ बजे से बारह बजे व फिर शाम चार बजे से छह बजे तक लोगों को उठानी पड़ी.
सड़कों पर जर्बदस्त जाम का नजारा दिन भर लगा रहा. जिला मुख्यालय के आठ परीक्षा केंद्रों पर एसटीईटी परीक्षा होने एवं समाहरणालय के सामने सीएए के विरोध में हो रहे धरना को लेकर शहर में अचानक भीड़ बढ गयी. भीड़ के बढ़ने से शंकर चौक से आरके कॉलेज, जेएन कॉलेज से बाबू साहब चौक, शंकर चौक से स्टेशन रोड, थाना चौक से हॉस्पिटल रोड में जाम के कारण परीक्षार्थी एवं स्थानीय लोगों को सड़क जाम से काफी परेशानी हुई. आलम यह था कि समाहरणालय के सामने वाली सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी परेशानी हुई.
जाम में फंसी एंबुलेंस. थाना चौक से वाटसन स्कूल तक दो विद्यालयों में एसटीईटी परीक्षा का केंद्र था एवं समाहरणालय के सामने सीएए के विरोध में धरना एवं अन्य दो संगठनों के धरना से पूरा शहर जाम की चपेट में था. इसके अलावे शहर में आरके कॉलेज, जेएन कॉलेज, मिथिला टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रिजनल सेकेंड्री स्कूल, जीएमएसएस विद्यालयों में परीक्षा केंद्र रहने के कारण हर सड़क पर जाम लगी थी. समाहरणालय के सामने सड़क पर लगी जाम में आम व खास सभी लोग घंटों फंसे रहे.
नहीं था ट्रैफिक का विशेष इंतजाम
शहर में बढने वाली भीड़ से जाम की आशंका पूर्व से ही था. पर ट्रैफिक की कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन के द्वारा नहीं किया गया था. ना ही अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था की गयी थी. ऐसे में जाम लगना स्वभाविक था. शहर में 8500 छात्रों एवं लगभग 5000 अभिभावकों की भीड़ एवं उनके वाहन से शहर भरा पड़ा था.