सबकुछ बह गया, कैसे कटेंगे दिन, बाढ़ में डूबे तिरपित का शव चार दिन बाद मिला

झंझारपुर (मधुबनी) : ओझौल गांव में शनिवार को तिरपित पंडित का श्राद्ध था. पूजा के लिए प्रसाद का इंतजाम नहीं हो सका है. किसी तरह रस्म पूरी की जा रही है. क्षत-विक्षत फूस के घर के एक कोने में तिरपित की पत्नी शनिचरी देवी चुपचाप बैठी हैं. एकदम मौन. कमला नदी की बाढ़ इस घर […]

झंझारपुर (मधुबनी) : ओझौल गांव में शनिवार को तिरपित पंडित का श्राद्ध था. पूजा के लिए प्रसाद का इंतजाम नहीं हो सका है. किसी तरह रस्म पूरी की जा रही है. क्षत-विक्षत फूस के घर के एक कोने में तिरपित की पत्नी शनिचरी देवी चुपचाप बैठी हैं. एकदम मौन. कमला नदी की बाढ़ इस घर की सारी खुशियां बहा ले गयी और छोड़ दिया अनिश्चित भविष्य.

इसी चिंता में डूब-उतरा रही शनिचरी देवी कभी रोती हैं तो कभी आसमान को निहार रही होती हैं. वह कहती हैं ‘ बाढ़ के पानी ने सब कुछ छीन लिया अब दोनों बेटियों का विवाह कैसे होगा. ‘ 13 जुलाई की रात बलमी मेहठ पंचायत के ओझौल गांव के समीप कमला नदी का पश्चिमी तटबंध टूटा था. हाहाकार मचाते हुए आयी बाढ़ ने न सिर्फ गांव के लोगों को बेघर कर दिया, बल्कि उन्हें दाने-दाने को मोहताज भी कर दिया है.

इस गांव में करीब तीन सौ घर थे, जिनमें से अधिकतर विलीन हो चुके. तिरपित का घर कुम्हार टोली में है. हालत ऐसी हुई कि किसी के दाह संस्कार व क्रिया कर्म तक के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाने पर मजबूर होना पड़ा. गांव के तिरपित पंडित की मौत भी इस बाढ़ में हो गयी. चार दिन बाद उनका शव मिला.

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