मधुबनी : मुजफ्फरपुर में लगातार चमकी बुखार बीमारी से बच्चों की हो रही मौत ने स्वास्थ्य महकमा को सकते में डाल दिया है. इस बीमारी से निपटने के जिले भर के स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट कर दिया गया है.सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य महकमा मुस्तैदी के साथ सतर्क है.
सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक के चिकित्सक को प्रशिक्षण देकर दवा उपलब्ध करा दी गयी है. हालांकि अब तक जिला में कहीं से भी (इन्सेफ्लाइटिस) चमकी बीमारी से प्रभावित कोई भी बच्चा सामने नहीं आया है. एसएनसीयू व इमरजेंसी में चमकी बीमारी की दवा उपलब्ध है. वहीं बच्चा वार्ड को भी विशेष तौर पर साफ सफाई कर दी गयी है व इसमें एसी को भी दुरुस्त कर दिया गया है.
लक्षण के अनुसार होता है इलाज: उन्होंने बताया लक्षण के अनुसार इस बीमारी का उपचार की जाती है.
बुखार आने पर बुखार की दवा चमकी आने उसे रोकने की दवा तथा डिहाइड्रेशन के लिए आइबी फ्ल्युट चलाया जाता है. ऐसा ही दावा सदर अस्पताल के एसएनसीयू के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. प्रमोद कुमार भी करते है. डा. प्रमोद कुमार ने बताया कि तेज बुखार के साथ चमकी आना दिमागी बुखार का लक्षण है. चमकी के कारण मरीज काफी सुस्त हो जाता है. जिसके कारण दिमाग पर काफी असर पड़ता है. जिसके कारण दिमाग पर काफी असर पड़ता है. जिस कारण इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है.
जिले में नहीं है जेई वैक्सीन : जैपनिज इंसेफ्लाइटिस वायरस के कारण यह रोग फैलता है. इस बीमारी का कोई विशेष इलाज बीमारी के लक्षण को पहचान कर चिकित्सक द्वारा उपचार किया जाता है. जैपनीज इंसेफ्लाइटिस वायरस को नियंत्रित करने के लिए जेई वैक्सीन भी 9 माह तथा 18 माह पर दो खुराक बच्चों को दिया जाता है. लेकिन जिला अस्पताल में जेइ वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वैक्सीन को देने के लिए परिजनों द्वारा अपने बच्चे को दरभंगा ले जाकर दिलाना पड़ता है. इस संबंध में आरआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेई वायरस से पीड़ित बच्चे जिला में नहीं है.
ये दवा है उपलब्ध : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ कुमार ने बताया कि एसएनसीयू में चमकी के रोकथाम के लिए गार्डिनर व फेनीट्वाइन, भेलपेरिन व लेब्रा आदि दवा उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि बच्चों को तेज बुखार आने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. झोला छाप डाक्टर के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. इससे बच्चे की जान को खतरा हो सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बुखार आने पर बच्चों को स्वयं या दुकानदार से भी पूछ कर दवा नहीं देनी चाहिए.
इस बीमारी का तत्काल इलाज ही इसकी सुरक्षा है. इस संबंध में सीएस डा. मिथिलेश झा ने कहा कि सदर अस्पताल से पीएचसी के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है. और उन्हें दवा उपलब्ध करा दी गयी है. साथ ही सदर अस्पताल के शिशु वार्ड को भी पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है. जिससे की आने वाले मरीजों को तत्काल सभी सुविधा उपलब्ध हो सके.
