मधुबनी : शहर में पॉलीथिन के कैरी बैग के उपयोग पर रोक लगेगी. 1 मई से पॉलीथिन बेचने वाले दुकानदार को जुर्माना देना होगा. किसी भी सूरत में पॉलीथिन के उपयोग को बरदाश्त नहीं किया जायेगा. इस प्रकार के तमाम वह निर्देश व चेतावनी बीते दिनों नप के बोर्ड की बैठक में सदस्यों के द्वारा पारित किया गया था.
मंशा यह थी कि पॉलीथिन के उपयोग से होने वाली बीमारी तथा प्रदूषण के कारण पॉलीथिन पर रोक लगायी जायेगी. पर आलम यह है कि पॉलीथिन के उपयोग के बंद होने की बात तो दूर, लगन के कारण पॉलीथिन की खपत अन्य दिनों की अपेक्षा डेढ गुना तक बढ़ गयी है.
बोर्ड की बैठक में उठी मांग
पॉलीथिन से फैलने वाले प्रदूषण एवं बीमारी को रोकने की दिशा में यह बात सदस्यों ने उठाया. विगत 28 फरवरी के बोर्ड की बैठक में वार्ड 14 के सदस्य व जिला योजना समिति एवं सशक्त स्थायी समिति सदस्य सुनिता देवी तथा वार्ड 21 के पार्षद सह सशक्त स्थायी समिति सदस्य मनीष कुमार सिंह ने पॉलीथिन के उपयोग से होने वाले प्रभाव की रोकथाम के लिए इसके रोक लगाने की मांग की थी. मुख्य पार्षद सुनैना देवी ने इसे गंभीरता से लेते हुए सशक्त स्थायी समिति के प्रस्ताव लाया. जिसे सभी सदस्यों ने पारित किया. अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में बोर्ड की बैठक में सदस्यों के अनुमोदन के बाद पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का निर्णय लिया गया.
हवा को बनाता है जहरीला. शहर में पॉलीथिन बैगों का बेतहाशा इस्तेमाल हो रहा है. प्रत्येक छोटे- बड़े दुकानों में इसका उपयोग होता है. विशेषज्ञों ने कहा है कि पॉलीथिन गलताा नहीं. उसे नहीं भी जलाया जाय तो लगातार हानिकारक गैसों का इससे उत्सर्जन होता रहता है. पॉलीथिन से निकलने वाली बेंजीन, क्लोराइड, इथनॉल आक्साइड एयर प्रदूषण फैलाती है. रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ डा. सीएम झा ने कहा कि पॉलीथिन के उपयोग से कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा रहता है.
काला पॉलीथिन अधिक घातक. पॉलीथिन में भी काला पॉलीथिन अधिक घातक होता है. यह ओजेन की परत को भी नुकसान पहुंचाता है. ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण भी पॉलीथिन है. पर्यावरण विद अमर कुमार कहते है कि इस्तेमाल के बाद फेके तो भी घातक, जला भी दें तो भी घातक. यह वाटर एवं एयर दोनों प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है. जमीन बंजर बना देता है तो पानी के स्त्रोत को भी बाधित करता है.
चाइनीज पाॅलीथिन की है सबसे अधिक डिमांड : बाजार में यूं तो कई किस्म के पालीथिन की बिक्री हो रही है. लेकिन सबसे अधिक डिमांड चाइनीज पालीथिन की है. कई व्यापारियों ने बताया कि चाइनीज पालीथिन हालांकि महंगा होता है, लेकिन यह काफी मजबूत होता है. दुकान पर आने वाले खरीदार भी समान को चाइनीज पालीथिन में ही देने की मांग करते हैं.
क्योंकि उन्हें समान ले जाने में समान के गिरने व पालीथिन के फटने का डर नहीं होता है. साथ ही यह पालीथिन देखने में भी अन्य पालीथिन से अधिक आकर्षक होता है.
100 से लेकर 150 रुपये प्रति किलो बिकता पालीथिन
बाजार में 100 रुपये, 120 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो बिकता है पालीथिन. वहीं 250 ग्राम से लेकर 10 किलो वजन तक का पालीथिन बाजार में उपलब्ध है. सबसे कम कीमत की पालीथिन 100 रुपये, उससे अच्छा पालीथिन 120 रुपया तथा सबसे महंगा चायनीज पालीथिन 150 रुपये किलो बिकता है. जिला में इस कारोबार के थौक विक्रेताओं की संख्या लगभग 100 से 140 तक है. इसके अलावा कई ऐसे कारोबारी भी है जो सीधे पालीथिन मंगाकर विक्रेताओं को उपलब्ध कराते है. पालीथिन दिल्ली के बबना, पटना सिटी, हाजीपुर, गुजरात सहित कई अन्य राज्यों से मंगाया जाता है. वहीं चायनीज पालीथिन नेपाल के रास्ते भी मंगाया जाता है. बाजार में कई प्रकार की पालीथिन उपलब्ध है. जिसमें 250 ग्राम से लेकर 10 किलो वजन वाले पालीथिन की कीमत एक ही है. बस पालीथिन की संख्या में केवल अंतर होता है. जैसे यदि 250 ग्राम की पालीथिन की कीमत 100 रुपये किलो है तो साधारण पालीथिन लगभग एक हजार अदद होगा. वहीं बेहतर गुणवत्ता वाले पालीथिन में इसकी संख्या 700 से 800 अदद की होगी.
बैठक तक सिमटा निर्देश
जिस दिन से पॉलीथिन की बिक्री पर रोक लगाने की बात हुई, उस दिन से इसकी खपत और अधिक हो गयी है. बाजार से मिली जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में प्रतिदिन 20 से 25 क्विंटल पॉलीथिन की खपत होती है. पर जिस दिन से पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगी उसके बाद से इसकी बिक्री में बढोतरी हो गयी. हालांकि बाजार सूत्रों का कहना है कि अप्रैल माह में लगातार शादी,मुंडन, जनेउ व अन्य लगन होने के कारण बिक्री में बढोतरी दर्ज की गयी है. वजह जो भी हो, आलम यह है कि अब तक पॉलीथिन के बिक्री पर रोक लगाने की पहल नप के कार्यालय में बैठक तक ही सिमट कर रह गया है. जिला में प्रति दिन 20 से 25 क्विंटल पालीथिन की खप्त हो रही है. जिसमें केवल मुख्यालय में ही प्रतिदिन 4 से 5 क्विंटल पालीथिन की खपत दुकानदारों द्वारा किया जा रहा है. जिससे यह कारोबार काफी तेजी से फलने- फूलने लगा है.
