मिथिला पेंटिंग, लोक गीत, लोक कथा बढ़ावा देने के साथ साथ कलाकारों की स्थिति

मधुबनी : मिथिला पेंटिंग, लोक गीत, लोक कथा के विकास व बढ़ावा देने के साथ साथ कलाकारों की स्थिति को सुधारने के दिशा में प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू कर दी गयी है. किस प्रकार इस क्षेत्र का विकास हो इसके लिए अधिकारियों व जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों से सुझाव लिया जा रहा […]

मधुबनी : मिथिला पेंटिंग, लोक गीत, लोक कथा के विकास व बढ़ावा देने के साथ साथ कलाकारों की स्थिति को सुधारने के दिशा में प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू कर दी गयी है. किस प्रकार इस क्षेत्र का विकास हो इसके लिए अधिकारियों व जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों से सुझाव लिया जा रहा है. साथ ही इसमें तकनीकी रूप से भी व्यापक पहल होगी.

समाहरणालय स्थित सभागार में मिथिला लोक चित्रकला/ मिथिला लोक गीत/लोक कथा समिति की पहली बैठक आयोजित की गयी. अध्यक्षता जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने की. जिसमें अपर समाहर्ता दुर्गानंद झा, ग्राम विकास परिषद के षष्ठीनाथ झा, सखी संस्था की सुमन सिंह, कला विभाग,ललित नारायण मिथिला विश्व विद्यालय के पुष्पम सरायण, चेतना समिति के उमेश मिश्र, विनीता झा, इंद्रभूषण रमण बमबम, नागेन्द्र यादव, अर्जुन राय, रोहित कुमार, कैलाश भारद्वाज, राकेश कुमार झा, संजीव झा, गंगानंद झा, डीसी कर्ण, रेमंत मिश्र, मनोज कुमार झा समेत समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे.

प्रचार प्रसार पर चर्चा. बैठक के दौरान में समिति के सदस्यों द्वारा मिथिला चित्रकला के विकास,प्रचार-प्रसार एवं उन्नयन, मिथिला लोक गीत/लोक कथा का विकास, प्रचार एवं उन्नयन पर विचार-विमर्श किया गया. कहा कि मिथिला लोक चित्रकला के विकास में जनसहभागिता को बढ़ावा देने, मिथिला चित्रकला का डिजिटल माध्यमों से प्रचार-प्रसार कराने, कलाकारों को लोन देने की प्रक्रिया सरल बनाने,कला के विकास हेतु आय का श्रोत बढ़ाने,अन्य वंचित कलाकारों को भी अवसर देने हेतु समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञापन प्रकाशित कर उन्हें जोड़ने से लोगो का झुकाव इस ओर होगा और इससे कलाकारों को अधिक लाभ मिल सकता है.
कलाकारों की डायरेक्ट्री बने. सदस्यों ने मधुबनी चित्रकला के मार्केटिंग हेतु वेबसाइट का निर्माण करने एवं सभी कलाकारों का डायरेक्ट्री बनाने का सुझाव दिया. सहायक निदेशक,वस्त्र मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि इंडिया मेड हैंडीक्राफ्ट पोर्टल पर कलाकार अपने उत्पादों को डाल सकते हैं,और ग्राहकों द्वारा उसकी खरीदारी की जायेगी. यह पूर्णतः निःशुल्क है. लेकिन इस पर कलाकार अपने तीन उत्पादों को ही डाल सकते है. तीन उत्पाद को बढाकर 25 से तीस उत्पाद तक करने के दिशा में पहल करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि मिथिला मेड हैंडीक्राफ्ट वेबसाइट बनाने का प्रस्ताव वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा जायेगा. जिससे कि सभी कलाकार अपने 25 से 30 उत्पादों को उक्त वेबसाइट पर डाल सकें. इससे मिथिला चित्रकला की मार्केटिंग बेहतर हो सकेगा.
दुर्लभ पेंटिंग के लिये बनेगा संग्रहालय . डीएम ने कहा कि रख रखाव का सही से इंतजाम नहीं होने के कारण कलाकारों का दुर्लभ पेंटिंग भी संरक्षित नहीं है. इसके संरक्षण के लिये सही से पहल की जायेगी. उन्होंने कहा कि मिथिला आर्ट पोर्टल का निर्माण किया जायेगा.
जिसमें मार्केटिंग के एक्सपर्ट को रखा जायेगा. नामचीन कलाकारों के विशिष्ट एवं दुर्लभ पेंटिंग को संरक्षित करने हेतु संग्रहालय का निर्माण कराया जायेगा. डीएम ने सभी कलाकारों से अपने-अपने घरों पर भी मिथिला पेंटिंग करने का आग्रह किया गया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह समिति की बैठक का आयोजन
किया जायेगा. ताकि एक-
दूसरे के सुझावों पर विचार-विमर्श किया जा सकें.

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