अनूठी पहल l समय पर मानदेय न मिलने की चिंता नहीं, जरूरतमंद शिक्षकों को मिलती है आर्थिक मदद
मधुबनी : राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने जिले के शिक्षकों की आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए एक अनूठी पहल की है. सरकार की ओर से हर माह मानदेय भुगतान नहीं होने पर शिक्षकों को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है. इन समस्याओं के निदान के लिए खुद ही संघ आगे आया है. संघ की ओर से एक ऐसा समूह तैयार किया गया, जिसमें खुद ही शिक्षक तय रकम जमा करते हैं.
इसका परिणाम यह है कि बूंद-बूंद कर घड़ा भरता गया और आज हर प्रखंड में यह समूह काम करने लगा है. यह समूह जरूरतमंद शिक्षकों को समय पर आर्थिक रूप से सहायता देता है. इसके लिए न तो घर के जेवरात गिरवी रखने की जरूरत है और न ही बैंक में लंबी लाइन लगने की. इस संगठन से जुड़े शिक्षकों को अब कर्ज के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाने की भी जरूरत नहीं होती.
एक फीसदी ब्याज पर देते हैं रकम
शिक्षकों के इस कोष से जो शिक्षक पैसे उठाते हैं उन्हें एक फीसदी सूद के साथ रकम चुकता करनी होती है. ब्याज का पैसा भी इसी कोष में जमा होता है. सदस्यों का कहना है कि ब्याज इसलिए लिया जाता है कि जल्द से जल्द शिक्षक पैसे जमा करें व संगठन और अधिक आर्थिक रूप से सबल हो. यह संगठन जिले के हर प्रखंड में काम कर रहा है. प्रधान सचिव अवधेश बताते हैं कि सबसे अधिक रकम रहिका प्रखंड में है. यहां वर्तमान में तीन लाख रुपये से अधिक रकम शिक्षकों ने उठाये हैं.
जिले के सभी प्रखंडों में किया गया राहत कोष का गठन
हर माह एक-एक हजार रुपये प्रारंभिक शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षक करते हैं जमा
जरूरत पड़ने पर शिक्षक कोष से राशि लेकर करते हैं अपना काम
ऐसे बना सहायता कोष
इस कोष में संघ के सभी सदस्य शिक्षक हर महीने एक-एक हजार रुपये जमा करते हैं. माह की 15 तारीख तक तय एक हजार रुपये जमा करने होते हैं. 15 तक यदि किसी कारणवश पैसे जमा नहीं होते हैं, तो उसके बाद दस रुपये विलंब शुल्क देकर सदस्य को अगले 15 तारीख तक जमा करना होता है. यानी विलंब शुल्क लगा तो 1010 रुपये देने होंगे.
एक हजार प्रतिमाह जमा करते हैं हर सदस्य
शिक्षक संघ के प्रधान सचिव अवधेश कुमार झा बताते हैं कि शुरू से ही हर माह शिक्षकों को पैसे नहीं आ रहे हैं. इस कारण जरूरत पड़ने पर शिक्षकों को भारी परेशानी होती थी. इस समस्या के निदान के लिए शिक्षकों की एक बैठक बुलायी गयी. प्रस्ताव रखा गया कि सभी शिक्षक मिलकर खुद ही अपनी जेब से रकम जमा करें, जिसे जरूरत पड़ने पर शिक्षकों को दिया जा सके. प्रस्ताव की सभी ने सराहना की और एक कोष का गठन किया गया.
