2017 में एचआइवी के 572 नये मरीजों की हुई पहचान

मधुबनी : जिला में एचआइवी एड्स प्रभावित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 17 से दिसंबर 17 तक 572 नये एचआइवी एड्स मरीजों का निबंधन एआरटी सेंटर में किया गया है. वर्ष 2011 से वर्ष 2017 दिसंबर तक जिला में कुल एचआइवी एड्स पीड़ित मरीजों की […]

मधुबनी : जिला में एचआइवी एड्स प्रभावित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 17 से दिसंबर 17 तक 572 नये एचआइवी एड्स मरीजों का निबंधन एआरटी सेंटर में किया गया है. वर्ष 2011 से वर्ष 2017 दिसंबर तक जिला में कुल एचआइवी एड्स पीड़ित मरीजों की संख्या 5 हजार 413 दर्ज किया गया है. जिसमें से 800 मरीजों की अब तक मृत्यु हो चुकी है. बाकि बचे सभी मरीजों का उपचार सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में किया जा रहा है.

अप्रैल से दिसंबर तक 572 नये मरीज हुआ निबंधित. माह अप्रैल से दिसंबर 17 तक जिला में 572 नये मरीजों का निबंधन सदर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में किया गया है. जिसमें 281 पुरुष, 230 महिला व 61 बच्चे शामिल है.
प्रतिवर्ष 5 सौ से 700 मरीजों का होता है इजाफा. जिला में प्रतिवर्ष 500 से 700 मरीजों की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. एआरटी सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में जिला में एड्स मरीजों की कुल संख्या 2620 था, वर्ष 2015 में यह आंकड़ा 3410 हुआ. वहीं वर्ष 2015 में 4113 मरीज तथा मार्च 2017 तक कुल मरीजों की संख्या 4815 पर पहुंच गया. ज्ञात हो कि जिला के अलावा मधेपुरा व सुपौल जिला के एड्स पीड़ित मरीजों का भी उपचार सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में किया जाता है. हालांकि जिला के कुल 5413 पंजीकृत एड्स मरीजों में सुपौल जिला के 371 मरीज व मधेपुरा के 25 मरीज ही शामिल है.
सरकार द्वारा कई योजनाओं का किया गया लागू. बिहार सरकार द्वारा एचआइवी एड्स पीड़ित मरीजों के लिए कई लाभकारी योजनाओं की शुरुआत की गयी है. इसके तहत परिवरिश योजना, असंगठित कामगार योजना के अलावा बिहार सरकार द्वारा भरण- पोषण योजना चालू किया गया है. परिवरिश योजना के तहत एड्स पीड़ित परिवार के 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सामाजिक सुरक्षा कोषांग एवं बाल विकास परियोजना द्वारा दिया जाता है. इस योजना के तहत जिला में लगभग दो हजार बच्चे लाभान्वित हो रहा है.
असंगठित कामगार योजना. असंगठित कामगार योजना के तहत श्रम विभाग द्वारा एड्स पीड़ित परिवार को एआरटी से सत्यापन के बाद स्वरोजगार के लिए 30 हजार रुपये देने का प्रावधान है. इस योजना के अंतर्गत एआरटी द्वारा सत्यापित 15 एड्स पीड़ित मरीजों का कागजात श्रम अधीक्षक कार्यालय को भेजा गया है.
भरण- पोषण योजना. बिहार सरकार द्वारा एड्स पीड़ित मरीजों को भरण पोषण के लिए प्रति माह 1 हजार 5 सौ रुपया देने का प्रावधान है जिसके लिए सरकार द्वारा 31 जनवरी 2018 आवेदन की अंतिम तारीख निर्धारित है. इस योजना से लाभ के लिए 24 जनवरी तक 1200 पीड़ित मरीजों का आवेदन एआरटी सेंटर से बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति को भेजा गया है. इसके अलावा सरकार द्वारा इलाजरत सभी एड्स मरीजों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये की दवा मुफ्त दी जाती है.
प्रति महीने मरीजों की होती है काउंसेिलंग
एआरटी सेंटर के नोडल पदाधिकारी डाॅ डीएस मिश्रा ने बताया कि एआरटी सेंटर में इलाजरत प्रत्येक एड्स पीड़ित मरीजों को प्रत्येक माह बुलाया जाता है. साथ ही मरीजों की काउंसेलिंग भी की जाती है. जिससे यह पता चलता है कि मरीज दवा का लगातार सेवन कर रहे हैं या नहीं. एआरटी सेंटर के जिला समन्वयक अभिषेक कुमार ने बताया कि असंगठित कामगार श्रम योजना के तहत 15 एड्स पीड़ित मरीजों का स्वरोजगार के लिए कागजातों का सत्यापन कर छह माह पूर्व श्रम अधीक्षक कार्यालय को भेज दिया गया है.

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