लापरवाही. आठ दरवाजे की जगह अब मात्र तीन दरवाजों पर तैनात हैं सुरक्षाकर्मी
विभिन्न थानों से रिमांड पर आने वाले आरोपित के रखने का नहीं है
कोई इंतजाम
मौके का फायदा उठा भाग जाते हैं आरोपित
मधुबनी : व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था में फिर से लापरवाही बरती जा रही है. सुरक्षा को लेकर दिये गये मेटल डिटेक्टर एवं सुरक्षा कर्मी की कमी कर दी गयी है. जिससे फिर से लोगों का बेरोकटोक न्यायालय परिसर में आवाजाही हो रही है. जो भी सुरक्षा कर्मी है उसके पास मेटल डिटेक्टर नहीं रहने से सघन तलाशी नहीं ले पा रहे हैं.
दूसरी ओर जिले से रिमांड के लिए आये कैदी को भी रखने के लिए भी कोर्ट परिसर में माकूल इंतजाम नहीं है. व्यवस्था की कमी के कारण कैदी की फरार होने की घटना हो चुकी है.
16 की जगह मात्र 11 सुरक्षा कर्मी
न्यायालय परिसर में जहां 16 सिपाही और एक प्रभारी एसआई, एक प्रभारी अवर निरीक्षक और तीन एएसआई की तैनाती की गयी थी. लेकिन, फिलहाल मात्र 6 सिपाही और एक प्रभारी एसआई, एक प्रभारी अवर निरीक्षक एवं तीन एसआई के भरोसे है सुरक्षा व्यवस्था.
रिमांड के लिए आये कैदी के लिए माकूल व्यवस्था नहीं. जिले भर के थानों से पकड़ाये अभियुक्त के लिए न्यायालय परिसर में माकूल व्यवस्था नहीं है. जिससे रिमांड पर लाये गये अभियुक्त के साथ कई बार फरार होने की घटना हो चुकी है. रिमांड पर आने वाले अभियुक्त को बरामदे पर ही खुले में रखा जाता है. ऐसे में पेशी के लिये कानूनी कागजी कारवाइ के दौरान हर जगह पर चौकीदार को आरोपित को अपने साथ लेकर जाना पड़ता है जिस कारण बीते दिनों इसका फायदा उठाकार हरलाखी थाना क्षेत्र से शराब कांड में धराया एक आरोपित भागने में सफल रहा.
पार्किंग नहीं होना सुरक्षा में बाधक. न्यायालय परिसर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने से पूरा परिसर बाइक से भरा रहता है.
जिससे सुरक्षा में व्यवधान होता है. हालांकि जिला एवं सत्र न्यायाधीश परिसर को सुरक्षा के कारण पार्किंग को हटा दिया गया है. लेकिन, बंदी हाजत परिसर में गाड़ी रहने के
कारण सुरक्षा के साथ-साथ कैदी वाहन को भी लाने ले जाने में परेशानी उठानी पड़ती है.
17 न्यायाधीश सहित सैकड़ों कर्मी रहते हैं मौजूद
व्यवहार न्यायालय में वर्तमान में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, एडीजे, मजिस्ट्रेट सहित सैकड़ों कर्मी न्यायालय में मौजूद रहते है. इसके साथ करीब 450 अधिवक्ता, 200 के करीब अधिवक्ता लिपिक एवं जिले भर से न्याय के लिए सैकड़ों की संख्या में पक्षकार भी पहुंचते है. पर इन सब की सुरक्षा का कोई माकूल इंतजाम नहीं है.
आठ प्रवेश द्वार पर हुई थी सिपाही की तैनाती
जिलों के न्यायालय परिसर में हुए हमले के बाद व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाने की पहल शुरू की गयी थी. इसके तहत न्यायालय परिसर में प्रवेश के आठ द्वार पर चिन्हित कर मेटल डिटेक्टर के साथ सुरक्षा कर्मी को तैनात किया गया था. प्रत्येक प्रवेश द्वार पर दो सुरक्षा कर्मी की तैनाती की गयी थी. लेकिन, सुरक्षा में ढ़िलाई बरतते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षाकर्मी के साथ-साथ मेटल डिटेक्टर में भी कमी कर दी गयी है.
