मधुबनी : कमजोर व संक्रमित बीमारी से ग्रसित बच्चों की मृत्युदर को कम करने के लिए विशेष नवजात शिशु केयर यूनिट की स्थापना सदर अस्पताल में किया गया. लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये एसएनसीयू में माताओं व उनके परिजनों के लिए रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी. जिसके कारण भर्ती नवजात को माता द्वारा यूनिट में ही दूध पिलाया जाता है. जिसके कारण अन्य बच्चों में भी संक्रमण होने का खतरा रहता है.
एक रेडियेंट वारमर में दो बच्चों का हो रहा इलाज
मधुबनी : कमजोर व संक्रमित बीमारी से ग्रसित बच्चों की मृत्युदर को कम करने के लिए विशेष नवजात शिशु केयर यूनिट की स्थापना सदर अस्पताल में किया गया. लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये एसएनसीयू में माताओं व उनके परिजनों के लिए रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी. जिसके कारण भर्ती नवजात को माता […]

छह रेडियेंट वारमर हैं खराब. सदर अस्पताल में 29 जून 2016 को तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा एसएनसीयू का उद्घाटन किया गया. इससे पूर्व संक्रमित व कमजोर बच्चों को डीएमसीएच व अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर किया जाता था. सदर अस्पताल में एसएनसीयू के उद्घाटन के बाद दर्जनों बच्चों को नई जिंदगी मिली. विगत पांच दिनों से एसएनसीयु के 12 रेडियेंट वारमर में से 6 रेडियेंट वारमर खराब है. जिसके कारण जब एक अवधि में छह से अधिक बीमार बच्चे आ जाते हैं तो एक रेडियेंट वारमर में दो नवजात को रखा जाता है. जिससे नवजात में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है.
वहीं रेडियेंट वारमर के खराब होने से कई बच्चों को डीएमसीएच रेफर किया जाता है. रेडियेंट वारमर के लिए एसएनसीयू में लगाये गये 50 केवीए का सर्वो स्टैवलाइजर भी लगभग पांच दिनों से खराब है.
अब तक नहीं लगा सी पाइप
एसएनसीयू में कार्यरत ए ग्रेड दिपमाला का कहना है कि सी पाइप से भर्ती बच्चों के उपचार करने में सुविधा होती है. जबकि एसएनसीयू निर्माण से अब तक सी पाइप नहीं लगाया गया है. जिसके कारण एसएनसीयू में भर्ती बच्चों के उपचार में कठिनाई होती है.