तंबू में कटती हैं पहरेदारों की सर्द रातें

हाल पुलिस लाइन में रहनेवाले जवानों का क्षतिग्रस्त हो चुका है पुलिस केंद्र, सुविधा नहीं छह माह पहले ही निर्माण के लिए आया था 84 करोड़, अब तक शुरू नहीं हो सका निर्माण मधुबनी : शहर के लोगों को सुरक्षित रखने वाले पुलिस के जवान व अधिकारी स्वयं असुरक्षित है. पुलिस केंद्र का भवन जहां […]

हाल पुलिस लाइन में रहनेवाले जवानों का

क्षतिग्रस्त हो चुका है पुलिस केंद्र, सुविधा नहीं
छह माह पहले ही निर्माण के लिए आया था 84 करोड़, अब तक शुरू नहीं हो सका निर्माण
मधुबनी : शहर के लोगों को सुरक्षित रखने वाले पुलिस के जवान व अधिकारी स्वयं असुरक्षित है. पुलिस केंद्र का भवन जहां एक ओर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है. वहीं दूसरी तरफ इसमें जवानों को जीवन के मूलभूत सुविधा भी सही से उपलब्ध नहीं है. ये जवान शौचालय, नल, बाथरूम के अभाव का दंश प्रतिदिन झेलने को विवश हैं. वर्तमान में भी करीब दो सौ जवान इस समय पुलिस लाइन में रहते हैं. दुख की बात तो तब है जब इस पुलिस केंद्र के नये सिरे से निर्माण के लिये छह माह पहले आयी करीब 84 करोड़ रुपये विभाग के पास पड़े हुए हैं. जानकारी के अनुसार पुलिस केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार ने 6 माह पूर्व ही लगभग 84 करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया गया है.
पर प्रस्तावित पुलिस केंद्र के निर्माण में कुछ तकनीकी अड़चन आने के कारण यह प्रस्ताव अब तक पूरा नहीं हो सका है. जिला पदाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि कानूनी अड़चन दूर होने के बाद शीघ्र ही पुलिस केंद्र बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. तत्काल पुलिस केंद्र में पांच शौचालय के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है.
नल व शौचालय का है अभाव. पुलिस मेंस एसोसिएशन के मंत्री संजय यादव व कोषाध्यक्ष जीतेंद्र कुमार ने कहा कि पुलिस केंद्र का भवन सुरक्षित नहीं रहने के कारण कई जवान सर्द की रातों में भी टेंट में सोते हैं. उन्होंने बताया कि कहने के लिए तो 20 शौचालय बना है, पर इन 20 शौचालयों में मात्र तीन शौचालय का इस्तेमाल होता है. बाकि सारे खराब पड़े है. यही हाल चापाकल एवं नल का है. पुलिस केंद्र के अंदर का दो चापाकल सूखा पड़ा है. यहीं हाल नल का भी है. नल से इतना गंदा पानी निकलता है कि कपड़ा साफ करने पर पीला पड़ जाता है.
बदहाली के बीच करते हैं ड्यूटी .बदहाली का आलम यह है कि पुलिस के जवान इस कंपकंपाती ठंड में भी जर्जर तंबू में रात गुजारते हैं, जो लोग अंदर रहते हैं उस जवान की परेशानी भी कम नहीं है. न खिड़की दुरुस्त है और न ही गेट, ऐसे में फटे हुए बोरी का पर्दा बना कर ठंड से बचने की कोशिश इन जवानों ने की है.
यही हाल खाना बनाने वाले स्थान का है. किसी खानाबदोश की तरह ही इन जवानों के लिए खाना बनाने वाली जगह है.
क्षतिग्रस्त हो चुका है भवन
दरभंगा राज का महल 1972 में जिला के स्थापना के बाद पुलिस केंद्र के रूप में दरभंगा राज घराने से किराये पर लिया गया था. रख रखाव के अभाव में यह भवन दिनों दिन जर्जर होता गया. रही सही कसर 1987 एवं 2014 के भूकंप ने पूरी कर दी. 2014 में आये भूकंप से पुलिस केंद्र का बुर्ज ढ़ह गया था. दीवारों एवं छत में दरारें पड़ गयी थीं. आलम यह हो गया कि बरसात के मौसम में पानी अंदर आने के कारण टेंट में पुलिस रहने को मजबूर हो गये हैं.
नौ कार्यालय चलते हैं ऊपरी मंजिल पर
दो महल मकान के ऊपरी मंजिल पर कार्यालय हैं. जिनमें प्रवचारी प्रवर कार्यालय, दीवा कार्यालय, रक्षित अवर निरीक्षक कार्यालय, जीपी शाखा, एमटी शाखा शामिल है. नीचे के हाल में जवान व अधिकारी रहते हैं. बाकी पुलिस केंद्र के बरामदे पर जवान किसी तरह रात गुजारते हैं.

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