ठंड का कहर. ब्लोअर व हीटर की बिक्री बढ़ी, अस्पताल में बढ़े मरीज
मधुबनी : कुहासा व सर्द पछिया हवा ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है. लोग घर से निकलने में भी परहेज कर रहे है. मंगलवार की सुबह का तापमान छह डिग्री पहुंचने से कनकनी कुछ अधिक ही रही. इस पर तेज पछिया हवा ने तो लोगो को कंबल व रजाई में ही दुबके रहने पर मजबूर कर दिया. दिन भर सूर्य देव का लुका छिपी का खेल जारी रहा. धूप निकलने पर लोग बाहर तो निकले, पर हवा के कारण धूप का मजा नहीं ले सके. इधर, ठंड बढ़ने के कारण इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बढ़ गयी है.
ब्लोअर व हीटर की हो रही जमकर खरीदारी . बीते एक सप्ताह से कंपकंपाती ठंड की वजह से इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बढ़ गयी है. बाजार से मिली जानकारी के अनुसार लोग ब्लोअर,क्वार्टज हीटर,हैलोजन हीटर, लोकल हीटर सहित गर्मी पाने के लिये कई प्रकार के उपकरण की खरीदारी कर रहे हैं. महिला कॉलेज रोड स्थित बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स के विक्रेता अनिल कुमार ने बताया है कि बाजार में इस साल हैलोजन हीटर की मांग अधिक है. बीते तीन से चार दिन में ही कई सामान बेच चुके हैं. वहीं बाजार के प्रमुख विक्रेताओं से मिली जानकारी के अनुसार अब तक करीब दो हजार से अधिक हीटर व ब्लोअर बाजार से लोगों ने बीते तीन दिन में खरीदारी की है.
ब्लोअर की अपेक्षा हीटर में बिजली की खपत कम .
विक्रेता अनिल कुमार ने बताया है कि ब्लोअर व हीटर की खरीदारी सोच समझ कर करना चाहिए. जानकारी के अनुसार ब्लोअर की अपेक्षा हीटर में बिजली की खपत कम ही होती है. ब्लोअर जहां 1000 से 2000 वाट बिजली की खपत करता है. वहीं नये तकनीक से बने क्वार्टज हीटर व हैलोजन हीटर 400 से 800 वाट की खपत करता है.
रैन बसेरा भी नहीं बना . शहर मुख्यालय में अब तक नप प्रशासन या जिला प्रशासन के द्वारा रैन बसेरा का इंतजाम नहीं हो सका है. जिस कारण कुहासे के साथ ही कंपकंपाती ठंड के कारण रिक्शा चालक, मजदूर या फुटपाथी दुकानदारों को रात बिताना
भारी हो जाता है. हर साल रैन बसेरा बनाया जाता था.
पर अब तक इस दिशा में पहल तक नहीं किया जा सका है. दिन व दिन ठंड बढ़ती जा रही है. तापमान में लगातार गिरावट होने से फसलों पर भी इसका व्यापक असर पड़ रहा है.
तापमान लुढ़का
ठंड का प्रकोप जारी है. लगातार तापमान में गिरावट हो रही है. मंगलवार को अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहा. जबकि न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस. कनकनी लगातार बढ़ते जा रहा है. पर अलाव का सरकारी इंतजाम नहीं किया जा रहा है. शहर मुख्यालाय में अलाव की खानापूरी की जा रही है. किसी किसी जगह पर दो चार किलो जलावन दिया जा रहा है. जो दो से तीन घंटे में ही समाप्त हो जाता है.
