कुमारखंड : प्रखंड क्षेत्र के घोड़दौल गांव में बिजली का खंभा और ट्रांसफार्मर गिरने से स्टेट बोरिंग की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गयी है. इससे सरकारी सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने के साथ किसानों के सामने पाट गलाने के लिए पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. पाट की कटाई का समय नजदीक आने के साथ किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.
ट्रांसफार्मर गिरने से बंद है स्टेट बोरिंग
ग्रामीणों के अनुसार, घोड़दौल में खेतों की सिंचाई के लिए स्टेट बोरिंग महत्वपूर्ण साधन है. लेकिन बिजली का खंभा और ट्रांसफार्मर गिरने के बाद बोरिंग से पानी की आपूर्ति बंद हो गयी है. पाट की कटाई के बाद उसे गलाने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. ऐसे में बोरिंग बंद रहने से किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है.
किसानों का कहना है कि समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से पाट की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. पाट को निर्धारित समय पर नहीं गलाया गया तो किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
खेतों में गड्ढा खोदकर पाट गलाने की तैयारी
स्टेट बोरिंग बंद होने के बाद किसान वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटे हैं. कई किसान अपने खेतों में गड्ढा खोदकर पाट गलाने की तैयारी कर रहे हैं. जिन खेतों में थोड़ी-बहुत नमी या पानी उपलब्ध है, किसान उसका इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
अधिकांश किसानों के सामने पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में पंपसेट फिलहाल किसानों का मुख्य सहारा बना हुआ है. किसान डीजल और बिजली से चलने वाले पंपसेट के जरिये खेतों या आसपास के जलस्रोत से पानी निकालकर पाट गलाने की तैयारी कर रहे हैं. इससे खेती की लागत बढ़ने की चिंता भी किसानों को सता रही है.
मुरलीगंज वितरणी नहर भी सूखी
घोड़दौल के पास से गुजरने वाली मुरलीगंज वितरणी नहर में भी पानी नहीं है. नहर सूखी रहने से किसानों को सिंचाई और पाट गलाने के लिए इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
किसानों का कहना है कि नहर में पानी रहता तो पाट गलाने के लिए उन्हें काफी राहत मिल सकती थी. लेकिन स्टेट बोरिंग बंद होने और नहर सूखी रहने से उनके पास सीमित विकल्प ही बचे हैं.
खंभा-ट्रांसफार्मर दुरुस्त कराने की मांग
ग्रामीण किसानों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से गिर चुके बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर को जल्द दुरुस्त कराकर स्टेट बोरिंग चालू कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि पाट गलाने का समय निकलने से पहले बोरिंग चालू नहीं हुई तो उन्हें निजी पंपसेट और डीजल के सहारे पानी की व्यवस्था करनी पड़ेगी.
किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से मुरलीगंज वितरणी नहर में भी पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि स्टेट बोरिंग की बिजली व्यवस्था बहाल होने और नहर में पानी उपलब्ध होने से ही किसानों को तत्काल राहत मिल सकेगी.
