ट्रफिक व्यवस्था पूरी तरह दिखी ध्वस्त, आवागमन में लोगों को परेशानी

लाखों लोगों की अचानक आमद के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई.

मधेपुरा.

बाबा नगरी सिंहेश्वर में सात दिनों तक चली कथा के दौरान धार्मिक आस्था से भरा माहौल देखने को मिला. इस कथा में देशभर से लाखों लोग शामिल हुए. जिन्होंने न केवल धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया, बल्कि इस पवित्र स्थान का अद्भुत अनुभव भी किया. लेकिन, कथा के अंतिम दिन, यानि रविवार को, जब लोग लौटने लगे, तब शहर की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे आम जनजीवन ठप हो गया.

सिंहेश्वर, जो अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, उन दिनों में विशेष रूप से भीड़ से भरा रहा. कथा के समापन से पहले प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास किए थे, लेकिन लाखों लोगों की अचानक आमद के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी. जिले के विभिन्न स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, कर्पूरी चौक, सुभाष चौक, मुख्य बाजार, थाना चौक, पुराना बस स्टैंड और कॉलेज चौक पर जाम की स्थिति बनी रही. लोग रास्ता भटकते रहे, और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से लचर रह गई.

– वाहन चालक वसूल रहे थे अधिक राशि –

आसपास के सभी क्षेत्रों में एक अव्यवस्था का आलम था. जब तक लोग एक चौक से दूसरे चौक पहुंचने का प्रयास करते, तब तक उन्हें कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता. कई वाहन चालक, निजी वाहनों के अलावा, रिक्शा और अन्य छोटे वाहनों के माध्यम से यात्रियों को अत्यधिक दरों पर ले जाते थे. जहां सामान्य रूप से यात्रा करने की दर 10 रुपये थी, वहीं यात्रियों से 50 रुपये तक वसूले जा रहे थे.

– भीड़ में बुजुर्गों को हुई परेशानी-

भीड़-भाड़ के बीच बुजुर्गों के लिए यात्रा करना विशेष रूप से कठिन हो गया. उमस भरी गर्मी में, उन्हें पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते देखा गया. प्रशासनिक व्यवस्था में कमी के कारण लोग न केवल भीड़ का शिकार हुए, बल्कि गर्म मौसम और पानी की कमी ने उनके लिए यात्रा को और भी कठिन बना दिया. इस स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि लाखों लोगों की एकत्रितता को संभालने के लिए उचित योजना और व्यवस्थाएं आवश्यक थीं. एक आयोजन की सफलता केवल उसके धार्मिक महत्व से नहीं मापी जाती, बल्कि उसके आयोजन के दौरान सुविधाएं और व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं. आधिकारिक रूप से, इस प्रकार के आयोजन की तैयारी में समय से पहले ट्रैफिक, स्वास्थ्य सेवाएं और पेयजल जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है. यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो इस तरह के संकट उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है.

– आवश्यक व्यवस्थाओं को भी देनी चाहिये प्राथमिकता –

सिंहेश्वर की कथा ने न केवल धार्मिक आस्था को उजागर किया, बल्कि अनेक सामाजिक और प्रशासनिक समस्याओं को भी उजागर किया. यह आवश्यक है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए प्रशासन द्वारा सख्त और प्रभावी व्यवस्थाएं की जाएं ताकि श्रद्धालुओं को इस प्रकार की अनियोजित कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. स्थानीय बुद्धिजीवियों की माने तो जब भी हम किसी बड़ी धार्मिक सभा या कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, तो हमें हमेशा उस कार्यक्रम के पीछे की आस्था के साथ-साथ उसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता देनी चाहिये. अतीत के अनुभवों से सीख लेकर, प्रशासन को भविष्य में बेहतर योजना बनानी चाहिए ताकि लोग न केवल अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभा सकें, बल्कि सुरक्षित और सुखद अनुभव भी कर सकें. अंत में, यह कथा सिंहेश्वर की पवित्रता को दस गुना बढ़ा गई, लेकिन साथ ही इसने प्रशासन को कई सवालों के साथ खड़ा कर दिया है, जिन्हें उन्हें हल करने की आवश्यकता है. धार्मिक आस्था और श्रद्धा के महत्व को ध्यान में रखें. इस तरह हम श्रद्धालुओं को उनकी आस्था के साथ-साथ एक सुरक्षित और सुखद अनुभव सुनिश्चित कर सकेंगे.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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