रमजान के पहले जुमे पर अल्लाह की बारगाह में झुके रोजेदारों के सिर, अमन चैन की मांगी दुआएं

मस्जिद के बाहर धूप से बचने के लिए तिरपाल लगाई थी.

– रमजान के पहले जुमा पर अल्लाह की बारगाह में किया सजदा,अमन चैन की मांगी दुआ –

– माहे रमजान के पहले जुमे की नमाज में उमड़े अकीदतमंद –

– खुदा की तरफ से अजमत रहमत व बरकतों से लबरेज हैं माह रमजान मुबारक –

प्रतिनिधि,

उदाकिशुनगंज, मधेपुरा.

खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वकफा है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम,भाईचारे एवं इंसानियत का संदेश भी देता है. मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है. माहे रमजान में बढते रोजो के साथ लोगों में इबादतो का दौर और भी तेज हो गया है. वही रमजान माह के पहले जुमे की नमाज बड़े ही अकीदत के साथ पढ़ी गई. पहले जुमे के मौके पर नमाज अदा करने के लिए पहुंचने वाले नमाजियों की संख्या को देखते ही काफी इंतजाम किए गए थे. मस्जिद के बाहर धूप से बचने के लिए तिरपाल लगाई थी. ताकि नमाज अदा करने के दौरान किसी को कोई परेशानी न हो. जुमे की नमाज अदा करने के लिए सुबह से ही घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं. लोग समय से पहले नए कपड़े पहनकर और इत्र लगाकर रोजेदार मस्जिद पहुंचे. मस्जिदों में खूसूसी दुआ भी कराई गई. उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र की सभी छोटी बड़ी मस्जिदों में जुमे की पहली नमाज पर भारी भीड़ देखने को मिली. इस मौके पर विभिन्न मस्जिदों में तकरीरें हुई जहां मस्जिद के इमाम ने रमजान की अहमियत बताई. साथ ही गरीबों की मदद करने का सुझाव दिया. इस्लाम में मान्यता है कि रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है. रमजान के एक माह को 10 -10 दिनो के रोजे के अनुसार पहला,दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है. पहला अशरा रहमत का होता है. दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है. और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है.

– कुरान की तिलावत में बीत रहा है रमजान –

रमजान महीने के पहले अशरे में रोजे रखने और नमाज अदा करने वालों पर अल्लाह की रहमत बरस रही है. पहले असरे के साथ ही अधिकांश जगहों पर तरावीह नमाज के बाद घरो में भी कुरान की तिलावत और दुआओ का दौर जारी है. सिंगारपुर जामा मस्जिद के इमाम मुज्जक्किर हसन नदवी बताते हैं कि यूं तो रमजान का पूरा महीना मोमिनो के लिए खुदा की तरफ से अजमत वाला व रहमतों और बरकतो से लबरेज है. लेकिन अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरो में तक्सीम किया है. पहला असरा खुदा की रहमत वाला है.

– एक से दस रमजान में खुदा की रहमत नाजिल होती है –

कहा जाता है कि रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिया जाता है. जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजक के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं. अल्लाह ताला अपनी रहमत से गुनाहगारों को मगफिरत दिलाते हैं. नेक काम के सवाब में 70 गुना इजाफा कर दिया जाता है. रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि लोगों को मालूम हो जाए कि रमजान क्या चीज है तो मेरी उम्मत साल के 12 महीने रमजान होने के तमन्ना करेगी. रमजान का महीना रहमत व बरकत वाला है. हर,मर्द,बच्चे,औरत एवं बूढ़े रोजे के साथ साथ नमाज तरावीह में मशगूल रहते हैं. लिहाजा रमजान माह की फजीलत के साथ साथ हर अशरा के इबादत का बेशुमार सवाब है. इतना ही नहीं माहे रमजान को मौसम ए बहार कहा गया है. यह इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना हैं. रोजा इस्लाम का पांच स्तंभों में से एक है. देखा जाता है कि जो मोमिन आम दिनों में इबादत से दूर होता है. जबकि रमजान में इबादत गुजार बन जाता है. वही समाज में गरीब और जरूरतमंदों के साथ हमदर्दी का महीना भी है. बताया जाता है कि रोजेदारों को एक इफ्तार कराने वाले के गुनाह माफ हो जाते हैं. इस महीने में पूरे कुरान की तिलावत की जाती है. हर असरे में इबादत करने की बेशुमार सवाब मिलता है. रमजान भर इबादत गुजार कुरान की तिलावत नफल नमाज पढ़ते हैं. हाजी मो निजाम उद्दीन, मो ओरेन्जेब आलम,इस्लाम साह,

सैफुल्लाह खालिद आदि ने बताया कि इसमें लोगों को चाहिए कि हर इबादत के बाद दुनिया और आखिरत के लिए रहमत मांगे,उन्होंने कहा कि जो सच्चे दिल से इबादत करता है गुनाहों से तौबा कर, दुआ मांगता है तो इस आश्रय की बरकत से अल्लाह उसकी गुनाहों को माफ कर देता है. वैसे तो रमजान का हर असरा फजीलत भरा है. मगर अंतिम आसरा जहन्नुम से आजादी के लिए खास होता है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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