Madhepura. ट्रैक्टर पर ओवरलोड कुछ इस तरह ढोये जा रहे मक्के की बोरी

ट्रैक्टर पर ओवरलोड कुछ इस तरह ढोये जा रहे मक्के की बोरी

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट. जिले में ओवरलोड वाहनों पर लगाम नहीं लगने से आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.खासकर रैक प्वाइंट से निकलने वाले भारी वाहन शहर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं. प्रशासन की ढिलाई के कारण ऐसे वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. रैक प्वाइंट से धड़ल्ले से निकल रहे ओवरलोड वाहन. स्थानीय लोगों के अनुसार रैक प्वाइंट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रक और डंपर सड़कों पर उतरते हैं. इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादा जाता है, जिससे सड़क पर उनका संतुलन भी प्रभावित होता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. जाम और आवागमन में हो रही परेशानी. ओवरलोड वाहनों की वजह से शहर के प्रमुख मार्गों पर अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है. खासकर व्यस्त समय में छोटे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार एंबुलेंस और जरूरी सेवाएं भी जाम में फंस जाती हैं. समय से पहले टूट रही सड़कें. ओवरलोडिंग का सीधा असर सड़कों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है. नई बनी सड़कें भी कुछ ही महीनों में उखड़ने लगती हैं. इससे सरकार की योजनाओं पर खर्च किया गया पैसा भी बेकार जा रहा है और लोगों को खराब सड़कों पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है. प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या की पूरी जानकारी है, बावजूद इसके ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. कभी-कभार जांच अभियान चलाया जाता है, लेकिन उसका असर स्थायी नहीं दिखता. अगर समय रहते ओवरलोडिंग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो न सिर्फ सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होंगी, बल्कि हादसों की आशंका भी बढ़ेगी. ऐसे में प्रशासन को इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लोगों को राहत मिल सके.

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By MANISH KUMAR

MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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