शहर के वार्ड संख्या चार एवं वार्ड संख्या पांच के स्थानीय निवासी इन दिनों बुनियादी नागरिक सुविधाओं के घोर अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. मानसून की लगातार हो रही बारिश और जलनिकासी (Drainage) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण इन इलाकों की मुख्य सड़कों और गलियों की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है. जगह-जगह बने गड्ढे, कीचड़ और जलजमाव ने आम लोगों का आवागमन दूभर कर दिया है.
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा बुरा असर, हादसे की बनी आशंका
वार्ड चार और पांच के निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर साल बारिश के मौसम में यही भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाती है:
- बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: सड़कों पर फैले गहरे कीचड़ और पानी के कारण बच्चों का स्कूल जाना काफी जोखिम भरा हो गया है. फिसलन की वजह से कई अभिभावक हादसों के डर से बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं.
- बुजुर्ग और महिलाएं परेशान: बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पैदल चलना भी एक चुनौती बन चुका है. रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए भी लोग घर से निकलने से कतरा रहे हैं.
सड़क तोड़कर महीनों से छोड़ा अधूरा, राहगीरों में आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने नगर प्रशासन पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है:
स्थानीय निवासी राम कुमार का दर्द: "घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है. हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का डर बना रहता है. कई महीने पहले सड़क को यह कहकर तोड़ा गया था कि जल्द ही इसका पक्कीकरण किया जाएगा. लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी काम अधूरा छोड़ देना जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है."
व्यापारियों और स्थानीय दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट
सड़क की बदहाली का बुरा असर स्थानीय बाजार और छोटे दुकानदारों के व्यवसाय पर भी साफ देखने को मिल रहा है:
- ग्राहकों ने मोड़ा मुंह: जर्जर और कीचड़ भरी सड़कों के कारण बाजार आने वाले लोग इन रास्तों से जाने से बचते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों का व्यापार ठप पड़ा है.
- दुकानदारों की आय घटी: स्थानीय नाई कौशल ठाकुर ने बताया, "बारिश के बाद ग्राहक दुकान पर आना बंद कर देते हैं. सड़क की स्थिति इतनी दयनीय है कि कोई इस तरफ आना ही नहीं चाहता. इससे हमारी daily रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है."
जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल
इलाके के लोगों ने नगर परिषद/नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से कच्चे रास्तों पर ईंट/रोड़ी बिछाकर आवागमन सुगम बनाया जाए, तथा ठप पड़ी जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त कर अधूरी सड़क का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए.
