‘स्वच्छ मधेपुरा, सुंदर मधेपुरा’ का सपना शहर में खुले में कचरा ढोने की व्यवस्था के कारण सवालों के घेरे में है. घनी आबादी वाले शहर में रोजाना बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और आम लोग बाजार व अन्य स्थानों पर आते-जाते हैं. इसी दौरान खुले ट्रैक्टर से कचरा ले जाने के कारण उड़ता कचरा राहगीरों और वाहन चालकों के शरीर व चेहरे पर गिर रहा है.
हर महीने करीब 30 लाख खर्च, फिर भी सड़क पर कचरा
शहर की साफ-सफाई पर नगर परिषद की ओर से हर महीने करीब 30 लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं. इसके बावजूद कचरा उठाने वाले ट्रैक्टरों को बिना ढके डंपिंग यार्ड तक ले जाया जा रहा है. ट्रैक्टर के पीछे का ढक्कन खुला रहने के कारण रास्ते भर कचरा गिरता रहता है. खराब सड़कों के कारण हिचकोले खाते ट्रैक्टरों से यह समस्या और बढ़ जाती है.
मुख्य मार्गों से गुजरते हैं कचरे से भरे ट्रैक्टर
शहर के विभिन्न कचरा प्वाइंट से कचरा उठाकर ट्रैक्टर पूर्णिया गोला, स्टेट बैंक रोड, कर्पूरी चौक, सुभाष चौक, कॉलेज चौक, पानी टंकी चौक समेत अन्य प्रमुख मार्गों से डंपिंग यार्ड तक पहुंचते हैं. इन रास्तों में कई विद्यालय और सार्वजनिक स्थान भी हैं. ऐसे में कचरा उड़ने से बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
एक ओर स्वच्छता का संदेश, दूसरी ओर खुले में कचरा परिवहन
शहरवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर कचरे का खुले में परिवहन किया जा रहा है. इससे दुर्गंध के साथ-साथ सड़क पर गंदगी फैलने और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है. राहगीरों का कहना है कि कचरा उठाने के बाद उसे ढककर ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए.
कार्यादेश में तिरपाल से ढककर ले जाने का प्रावधान
जानकारी के अनुसार, पिछले महीने से शहर की सफाई का काम नगर परिषद विभागीय स्तर पर करा रहा है. कार्यादेश के बिंदु संख्या 15 में कचरा निस्तारण के दौरान ट्रैक्टर अथवा अन्य वाहनों को तिरपाल से ढककर ले जाना अनिवार्य किया गया है. इसके बावजूद खुले वाहनों से कचरा परिवहन किया जा रहा है. नगर परिषद की ओर से सफाई कर्मियों को कचरा ढककर ले जाने का निर्देश दिये जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर इसका पालन नहीं दिख रहा है.
नाक, आंख और त्वचा पर पड़ सकता है असर
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. यश शर्मा के अनुसार, कचरे के संपर्क में आने से आंख, कान, गला, फेफड़ा और त्वचा प्रभावित हो सकती है. कचरे के कण नाक के माध्यम से शरीर में जाने पर स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ सकता है. ऐसे में खुले ट्रैक्टर से कचरा ढोने की व्यवस्था राहगीरों के लिए परेशानी के साथ स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी पैदा कर रही है.
कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी
शहरवासियों का कहना है कि खुले में कचरा ढोने की समस्या से अधिकारी भी अनजान नहीं हैं. इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. लोगों ने नगर परिषद प्रशासन से कचरा परिवहन के दौरान वाहनों को अनिवार्य रूप से ढकने और रास्ते में कचरा गिरने से रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
