मधेपुरा: ₹4.68 करोड़ की लागत से बनी 5 KM लंबी 'पुरैनी-कडामा' सड़क में 500 से अधिक गड्ढे, पैदल चलना भी दूभर

मधेपुरा जिले में ₹4.68 करोड़ की लागत से बनी 5 किलोमीटर लंबी पुरैनी से कडामा मुख्य सड़क भ्रष्टाचार और अनदेखी का शिकार हो गई है. बनने के कुछ महीनों बाद ही 500 से अधिक गड्ढे हो गए हैं, जिससे आवागमन खतरनाक हो गया है. ग्रामीण अब चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं.

मधेपुरा जिले के पुरैनी प्रखंड अंतर्गत वीरपुर-बिहपुर (NH 106) को उदाकिशुनगंज-भटगामा (SH 58) से जोड़ने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण पुरैनी से कडामा मुख्य सड़क भ्रष्टाचार और विभागीय अनदेखी के चलते पूरी तरह बदहाल हो चुकी है. लगभग ₹4.68 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बनी महज 5 किलोमीटर लंबी यह सड़क बनने के कुछ महीनों बाद ही गड्ढों में तब्दील हो गई थी. वर्तमान में पूरी सड़क पर 500 से अधिक खतरनाक गड्ढे उभर आए हैं, जिससे यह मार्ग सुरक्षित आवागमन के बजाय आए दिन होने वाले हादसों का प्रमुख कारण बन गया है. ठेकेदार पर कार्रवाई न होने और मरम्मत नहीं कराए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब चरणबद्ध आंदोलन का अल्टीमेटम दे दिया है.

₹4.68 करोड़ की लागत, 3 महीने में ही उखड़ गई सड़क

सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • सांसद ने किया था उद्घाटन: 6 फरवरी 2023 को संवेदक अनुज कुमार भगत द्वारा बनाई गई इस सड़क का लोकार्पण सांसद दिनेश चंद्र यादव सहित कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुआ था.
  • निर्माण के समय ही उठे थे सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान ही घटिया सामग्री के इस्तेमाल का विरोध कर काम रोका गया था, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अफसरों की चुप्पी के कारण ठेकेदार ने मनमानी की.
  • 3 महीने में 500 गड्ढे: बनने के तीन से चार महीने के भीतर ही सड़क उखड़ गई. आलम यह है कि 5 किलोमीटर के पूरे मार्ग में 200 मीटर भी ऐसा पैच नहीं बचा है, जहां गड्ढे न हों.

5 KM के लिए ₹30 किराया, सबसे अधिक पिस रहे किसान और मजदूर

सड़क की जर्जर स्थिति का सीधा आर्थिक बोझ आम जनता की जेब पर पड़ रहा है:

  • तीन गुना अधिक किराया: सामान्य तौर पर 5 किलोमीटर की दूरी का ऑटो या सवारी गाड़ी का किराया ₹10 होता है, लेकिन गड्ढों और बदहाल रास्ते का हवाला देकर वाहन चालक किसानों, मजदूरों और छात्रों से ₹30 तक मनमाना किराया वसूल रहे हैं.
  • प्रखंड व बाजार पहुंचना मुश्किल: पुरैनी मुख्य बाजार, प्रखंड सह अंचल कार्यालय, अस्पताल और कॉलेज जाने वाले सैकड़ों ग्रामीण और छात्र रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं.

स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और छात्रों की जुबानी

  • कुंदन सिंह (मुखिया, कुरसंडी पंचायत):
"यह समझना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क बची है. हमने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक संवेदक पर कार्रवाई और नई सड़क की मांग की, लेकिन मरम्मत तक नहीं हुई. वाहन चालक भी मनमाना किराया वसूल रहे हैं."
  • सुशील चौधरी उर्फ मुन्ना (ग्रामीण):
"सड़क पर गाड़ियों से चलना तो दूर, पैदल चलना भी नामुमकिन है. बारिश में गड्ढों में जलजमाव, कीचड़ और फिसलन से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. सरकार के सहयोग पोर्टल पर शिकायत दी गई है; अगर समाधान नहीं हुआ तो हम सड़क पर उतरेंगे."
  • त्रिलोचन झा (छात्र):
"पुरैनी हमारा मुख्य केंद्र है, लेकिन सड़क की यह दशा है कि चाहकर भी समय पर नहीं पहुंच पाते. मेंटेनेंस अवधि में होने के बावजूद ठेकेदार ने कोई मरम्मत नहीं कराई."

निर्मल ठाकुर (सांसद प्रतिनिधि):

"सड़क निश्चित तौर पर काफी जर्जर है. हमने संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी से बात की है और उन्होंने जल्द मरम्मत कराने का पूर्ण भरोसा दिया है. इस मुद्दे को 20-सूत्री कमेटी की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया है."


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By Prabhat khabar news desk

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