Madhepura News: मधेपुरा जिले के गम्हरिया प्रखंड के बभनी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दहा में शनिवार को मिड-डे मील खाने के बाद करीब 60 बच्चों के बीमार पड़ने से हड़कंप मच गया. भोजन के कुछ देर बाद बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और ग्रामीण भी बड़ी संख्या में विद्यालय पहुंच गए.
बच्चों को आनन-फानन में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार होने की जानकारी मिली. घटना के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रसोइया को चयन मुक्त कर दिया और विद्यालय के प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण यानी शोकॉज मांगा है. हालांकि इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर कई गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं.
क्या कार्रवाई केवल रसोइया तक सीमित रहेगी?
घटना के बाद सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या केवल रसोइया को हटाना और प्रधानाध्यापक से जवाब मांग लेना ही पर्याप्त कार्रवाई है. ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि भोजन की गुणवत्ता में गड़बड़ी हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल खाना बनाने वाले व्यक्ति पर नहीं डाली जा सकती.
स्थानीय लोगों का सवाल है कि विद्यालयों के किचन शेड, खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और साफ-सफाई की नियमित जांच किस स्तर पर होती है. यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती, तो ऐसी घटना को पहले ही रोका जा सकता था.
मिड-डे मील व्यवस्था पर उठे सवाल
मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूलों में बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. इसके लिए भोजन वितरण से पहले शिक्षकों द्वारा भोजन चखने और उसकी गुणवत्ता की जांच करने का भी प्रावधान है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उस दिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था.
यदि भोजन पहले जांचा गया था, तो बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या थी. और यदि जांच नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है. इन सवालों का जवाब अभी तक सामने नहीं आया है.
अभिभावकों में गहरा असंतोष
घटना के बाद से बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है. उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा और पोषण की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं, लेकिन यदि भोजन ही असुरक्षित हो जाए तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की केवल औपचारिक जांच न हो, बल्कि खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण, भोजन निर्माण और निगरानी व्यवस्था की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या आपूर्ति से जुड़े व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.
Madhepura News: आगे क्या हो सकता है
फिलहाल शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई कर दी है, लेकिन पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है. यदि जांच में खाद्यान्न की गुणवत्ता, आपूर्ति प्रक्रिया या निगरानी व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदारी का दायरा बढ़ सकता है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर मिड-डे मील व्यवस्था की नियमित निगरानी, खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे की जान जोखिम में न पड़े.
Also Read: RJD की 20 साल की सियासी कहानी: 2005 की हार से 2020 की वापसी और 2025 के झटके तक, कहां चूकी पार्टी?
