Madhepura News: मधेपुरा में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. अब पारंपरिक तरीके से खेती करने के बजाय कम अवधि में अधिक उत्पादन लेने और फसल प्रबंधन को बेहतर बनाने की जानकारी किसानों को सीधे कृषि वैज्ञानिकों से मिलेगी. वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र-राज्य प्रायोजित त्रि-फसली प्रणाली योजना के तहत मधेपुरा जिले में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है.
पहले चरण में धान की फसल को लेकर किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. जिले के सभी 13 प्रखंडों में चयनित 13 पंचायतों के क्लस्टर में यह प्रशिक्षण आयोजित किया जाना है. प्रशिक्षण में किसानों को खेती की ऐसी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, जिनसे कम अवधि वाली उच्च उपजशील धान की किस्मों से बेहतर उत्पादन लेने में मदद मिल सके.
13 पंचायतों में किसानों को मिलेगी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 27 अगस्त को जिले की पांच पंचायतों में किया गया. इनमें मधेपुरा प्रखंड के सकरपुरा बैतोना, घैलाढ़ प्रखंड के चित्ती, गम्हरिया प्रखंड के ईटवा जीवछपुर यानी जोगबनी, शंकरपुर प्रखंड के मौरा झरकाहा और सिंहेश्वर प्रखंड के सुखासन पंचायत शामिल हैं.
जिले के 13 प्रखंडों की 13 पंचायतों में चयनित क्लस्टर पर यह एक दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण 27, 29 और 31 अगस्त को आयोजित किया जायेगा.
हर प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब 50 से 60 चयनित किसानों को शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े व्यावहारिक और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देकर उत्पादन क्षमता बढ़ाना है.
वैज्ञानिक बतायेंगे कम अवधि में ज्यादा उपज का तरीका
जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक आत्मा रितेश रंजन ने बताया कि प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, प्रखंड स्तर के प्रसार कर्मी और जिला स्तर के पदाधिकारी किसानों को जानकारी देंगे.
किसानों को खास तौर पर अल्प अवधि वाली उच्च उपजशील धान की वैज्ञानिक खेती के बारे में बताया जायेगा. इसके साथ ही फसल प्रबंधन की तकनीक भी समझायी जायेगी.
किसानों के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि धान की खेती में सही समय पर बुआई या रोपाई, उचित किस्म का चयन, पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल और फसल की नियमित निगरानी उत्पादन को प्रभावित करती है. वैज्ञानिक तरीके अपनाने से किसान उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं.
एक दिन की ट्रेनिंग, सीधे खेतों के काम की जानकारी
प्रशिक्षण को गैर आवासीय रखा गया है, ताकि किसान अपने क्षेत्र से प्रशिक्षण स्थल तक पहुंचकर जानकारी प्राप्त कर सकें और वापस लौट सकें.
इस दौरान किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय धान की वैज्ञानिक खेती और फसल प्रबंधन से जुड़ी जरूरी तकनीकों से अवगत कराने पर जोर दिया जा रहा है. कृषि विभाग का उद्देश्य है कि प्रशिक्षण के बाद किसान अपनी खेती में इन तकनीकों को अपनाकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकें.
पहले दिन इन कृषि वैज्ञानिकों ने संभाली जिम्मेदारी
27 अगस्त को सकरपुरा बैतोना में डॉ सुरेंद्र कुमार चौरसिया, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र मधेपुरा ने प्रशिक्षण का शुभारंभ किया.
घैलाढ़ और गम्हरिया में डॉ आशुतोष कुमार और डॉ अनिल कुमार ने किसानों को प्रशिक्षण दिया. वहीं सिंहेश्वर और शंकरपुर में डॉ पंकज कुमार यादव और डॉ सुनील कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया.
Madhepura News: किसानों के लिए क्यों अहम है यह प्रशिक्षण
मधेपुरा जैसे कृषि प्रधान जिले में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं. ऐसे में खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक किसानों की आमदनी के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है.
त्रि-फसली प्रणाली के तहत शुरू किया गया यह प्रशिक्षण किसानों को केवल एक फसल की तकनीक समझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.
अब प्रशिक्षण के बाद किसान वैज्ञानिकों से मिली जानकारी को अपने खेतों में कितना प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, यह इस योजना की सफलता का अहम आधार होगा.
