करोड़ों खर्च के बाद भी मधेपुरा बेहाल : ड्रेनेज परियोजना अधूरी, लोग जलजमाव से परेशान

Madhepura Drainage Project: मधेपुरा शहर को जलजमाव से स्थायी राहत दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई 67.34 करोड़ रुपये की ड्रेनेज परियोजना वर्षों बाद भी अधूरी है. करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हल्की बारिश में भी शहर के कई इलाके जलमग्न हो रहे हैं. अतिक्रमण, बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और 36 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी हुई है.

मधेपुरा से सविता नंदन कुमार की रिपोर्ट:


Madhepura Drainage Project: मानसून की पूरी तरह सक्रियता से पहले ही मधेपुरा शहर में जलजमाव की समस्या फिर सामने आने लगी है. कुछ घंटों की बारिश के बाद ही कई सड़कों, गलियों और मोहल्लों में पानी जमा हो जाता है. इससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. ऐसे में शहरवासियों की उम्मीदें एक बार फिर उस वॉटर ड्रेनेज सिस्टम परियोजना पर टिक गई हैं, जिसे जलजमाव की स्थायी समस्या का समाधान बताया गया था.

शहर में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि ड्रेनेज परियोजना को लगभग 72 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी. हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार परियोजना का टेंडर 67 करोड़ 34 लाख 67 हजार 830 रुपये में हुआ. स्वीकृत राशि और टेंडर राशि के बीच अंतर को लेकर भी लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं.

15.340 किलोमीटर में से 10 किलोमीटर कार्य पूरा

शहर को जलजमाव से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का निर्माण कार्य बुडको के माध्यम से कराया जा रहा है. परियोजना के तहत कुल 15.340 किलोमीटर नाला निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.

बुडको के प्रोजेक्ट मैनेजर आशुतोष ठाकुर के अनुसार अब तक लगभग 10 किलोमीटर नाला निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि जहां नालों को पूरी तरह मुख्य निकासी तंत्र से जोड़ दिया गया है, वहां जल निकासी बेहतर तरीके से हो रही है. कर्पूरी चौक से न्यू बस स्टैंड होते हुए भिड़खी काली मंदिर पुल तक नाला सुचारू रूप से कार्य कर रहा है.

हालांकि शहर के अधिकांश हिस्सों में परियोजना अभी अधूरी है, जिसके कारण लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है.

अतिक्रमण और बिजली के पोल बने बाधा

प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार कई स्थानों पर नालों को मुख्य निकासी प्रणाली से जोड़ने में अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आया है. इसके अलावा बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और अन्य संरचनाएं भी कार्य में बाधा उत्पन्न कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी. वहीं बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में भी काफी विलंब हुआ. परियोजना का कार्य दिसंबर 2024 में शुरू हुआ, लेकिन संबंधित एकरारनामा मई 2026 में जाकर संपादित हो सका.

36 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी लंबित

ड्रेनेज परियोजना की धीमी प्रगति के पीछे वित्तीय संकट भी एक बड़ी वजह बनकर उभरा है. बुडको के अनुसार मार्च 2025 के बाद से किसी नए बिल का भुगतान नहीं किया गया है.

वर्तमान में लगभग 36 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने से संवेदक की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है. मजदूरों और कर्मचारियों के भुगतान का दबाव बढ़ रहा है, जिससे शेष कार्यों को आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है.

उन्होंने बताया कि विभाग और उच्च अधिकारियों को कई बार भुगतान के लिए पत्र भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

नालों की सफाई नहीं होने से बढ़ी समस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद स्तर पर नालों की नियमित सफाई नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो गई है. बड़े नालों में गाद जमा है, जबकि छोटे नाले कचरे से भरे हुए हैं.

लक्ष्मीपुर, पोस्ट ऑफिस गली, कर्पूरी नगर सहित कई इलाकों में मामूली बारिश के बाद ही जलजमाव की स्थिति बन जाती है. लोगों का मानना है कि ड्रेनेज परियोजना पूरी होने और नालों की नियमित सफाई होने के बाद ही समस्या का स्थायी समाधान संभव है.

जांच हुई, विरोध हुआ, फिर भी नहीं मिला समाधान

यह परियोजना पहले भी कई बार विवादों में रही है. निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने विरोध प्रदर्शन किया था और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई थी. बाद में विभागीय स्तर पर जांच भी हुई.

इसके बावजूद परियोजना आज तक अधूरी है और शहर के लोग हर बारिश में जलजमाव की समस्या झेलने को मजबूर हैं.

जनता के सवाल अब भी कायम

शहरवासियों का सवाल है कि जब 67 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना पर वर्षों से काम चल रहा है, करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं और लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है, तो फिर हल्की बारिश में भी शहर जलमग्न क्यों हो जाता है.

लोग यह भी जानना चाहते हैं कि 36 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान कब होगा, शेष कार्य कब पूरा होगा और मधेपुरा को जलजमाव से स्थायी मुक्ति आखिर कब मिलेगी.

ALSO READ:कुख्यात अपराधियों की सूचना दें, पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त : मधेपुरा पुलिस

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shruti Kumari

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >