Madhapura News: बिहार सरकार ने वर्ष 2019 में ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा दिया था. लेकिन मधेपुरा सदर प्रखंड के मिठाई उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थिति सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है. हाई स्कूल का दर्जा मिलने के वर्षों बाद भी न अलग भवन बना, न चारदीवारी का निर्माण हुआ और न ही सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध हो सके हैं. इसका सीधा असर सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
750 से अधिक छात्र, लेकिन सिर्फ 10 कमरों में चल रही पढ़ाई
विद्यालय परिसर में कुल 10 कमरे हैं. इनमें छह कमरों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है, जबकि सिर्फ चार कमरों में कक्षा नौ से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. विद्यालय में पहली से 12वीं तक 750 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. कमरों की कमी के कारण कई कक्षाओं में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना पड़ता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
हाई स्कूल के लिए नहीं बना अलग भवन
उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा नौ से 12वीं तक 400 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. अलग भवन नहीं होने के कारण हाई स्कूल की सभी कक्षाएं मध्य विद्यालय के चार कमरों में ही संचालित हो रही हैं. अधिक उपस्थिति होने पर विद्यार्थियों को बैठने तक में परेशानी होती है और नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होता है.
लैब, कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास सिर्फ कागजों तक सीमित
विद्यालय की छात्राओं स्नेहा कुमारी और स्वीटी कुमारी ने बताया कि विज्ञान प्रयोगशाला, संगीत और कंप्यूटर शिक्षा के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन अलग कमरा नहीं होने के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है. छात्र अंकुश कुमार ने कहा कि संसाधनों की कमी से उनकी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है.
Madhapura News: शिक्षकों की कमी भी बनी बड़ी चुनौती
प्रधानाध्यापक गौतम कुमार ने बताया कि विद्यालय में म्यूजिक, संस्कृत और पॉलिटिकल साइंस जैसे विषयों के शिक्षक नहीं हैं. कई बार शिक्षा विभाग को अतिरिक्त शिक्षक और भवन निर्माण के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. कमरों के अभाव में विज्ञान प्रयोगशाला और स्मार्ट क्लास भी वर्षों से बंद पड़ी हैं.
ग्रामीणों ने उठाए सवाल, सहयोग पोर्टल पर भी दर्ज कराई शिकायत
स्थानीय ग्रामीण अशोक कुमार ने कहा कि विद्यालय का उत्क्रमण केवल कागजों तक सीमित रह गया है. भवन, चारदीवारी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. उन्होंने बताया कि इस समस्या की शिकायत सरकार के सहयोग पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.
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