गम्हरिया प्रखंड मुख्यालय के हृदय-स्थल, भागवत चौक से दक्षिण की ओर जाने वाली सहरसा सड़क पर, जहां कभी स्टेट बैंक का वह पुराना एटीएम खड़ा है, वहां पिछले पन्द्रह वर्षों से एक धार्मिक अनुष्ठान निर्बाध रूप से चल रहा है. यह केवल पूजा नहीं, लोक-आस्था का एक अखंड प्रवाह है.
इस वर्ष भी गणेश महोत्सव को लेकर क्षेत्र में एक विशेष उत्साह का संचार दिखाई दे रहा है. समय के साथ यह उत्सव केवल आयोजन नहीं रह गया, वह जन-मानस की सामूहिक चेतना का पर्व बन गया है.
आराधना केवल बाह्य उपचार नहीं, एक आंतरिक अनुशासन
आयोजन समिति से संबद्ध श्री सुरेश कुमार सुमन उर्फ मुन्ना भगत ने बताया कि यहां पांच दिनों तक विधि-विधान के साथ गणपति की आराधना की जाती है. यह क्रम केवल बाह्य उपचार नहीं, एक आंतरिक अनुशासन है. प्रतिदिन प्रातः और सायं की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं. शंख और घंटे की ध्वनि के बीच जब आरती की लौ प्रज्ज्वलित होती है, तब समूचा वातावरण एक भक्तिमय गंभीरता से भर उठता है.
सबको एक सूत्र में बांधता है प्रसाद
सायं आरती के उपरांत भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है. यह प्रसाद केवल अन्न नहीं, सामूहिक विश्वास का वह अंश है, जो सबको एक सूत्र में बांधता है.
इस धार्मिक आयोजन को सुचारू रूप से चलाने में श्री राजीव कुमार भगत, श्री राहुल सिंह, श्री गंगाराम मेहता आदि कई सज्जन अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनके इस निष्काम सहयोग से ही यह महोत्सव प्रतिवर्ष अपनी मर्यादा में सम्पन्न होता है.
उत्सव जब बन जाता है परंपरा
इन दिनों समूचे इलाके में एक सात्विक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है. 15 वर्षों की यह निरंतरता बताती है कि उत्सव जब लोक के हृदय में बस जाता है, तब वह परंपरा बन जाता है.
