पांच सौ रुपए बोरी यूरिया लेने को मजबूर किसान

कहीं-कहीं दुकान पर इससे अधिक में प्रति बोरी यूरिया बेची जा रही है.

उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. यूरिया की किल्लत से प्रखंड क्षेत्र के किसानों के बीच हाहाकार मच गया है. शुक्रवार को किसान बोकु ऋषिदेव, पुलहट पासवान, रिजवान राइन, संतोष मुखिया, कामों पासवान, दिलखुश साह, संजय मिस्त्री, अशोक मिस्त्री, मंजीत पासवान आदि किसानो ने बताया कि उदाकिशुनगंज प्रखंड क्षेत्र में यूरिया उपलब्ध ही नहीं है. कुछ दुकानों में यूरिया पांच सौ रूपया बोड़ी बेचा जा रहा है. जबकि यूरिया का सरकारी मूल्य 266 रूपया है. किसानों की माने तो मकई के फसल में यूरिया की खास जरूरत है. इस परिस्थिति में दुकानदार यूरिया देने से इनकार कर रहे है. किसानों का कहना है कि करौती बाजार, अमोना, बैरागी टोला, महुआ बाजार सहित अन्य दुकानों पर चार सौ से लेकर पांच सौ रूपये प्रति बोरी यूरिया बेची जा रही है. कहीं-कहीं दुकान पर इससे अधिक में प्रति बोरी यूरिया बेची जा रही है. किसानों का कहना है कि यूरिया का अंतिम छिड़काव खेतों में नहीं किया गया तो इससे दाना और बालियां कमजोर होगी और पैदावार भी प्रभावित हो सकती है. सिंगारपुर के रहने वाले एक सीमांत किसान सनोज राम ने कहा कि हम रबी के इस सीजन में उर्वरक के संकट का सामना कर रहे है लेकिन सरकार हमारी मदद के लिए कुछ नहीं कर रही है. हम बेसहारा हैं. यूरिया की कमी की वजह से हम सबकी रबी की फसल पर असर पड़ेगा. अब्दुल गनी ने बताया कि उन्हें अपनी मक्का की फसल के लिए यूरिया की बहुत जरूरत थी लेकिन दुकानों पर यह नहीं मिली. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों के लिए मक्का एक नकदी फसल है, मक्के को स्थानीय भाषा में यहां पीला सोना कहा जाता है और यह इस क्षेत्र में बहुतायत में होता है.

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