आलमनगर (मधेपुरा). लगातार बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी के कारण कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बन गई है. कई गांवों के चारों ओर पानी फैल जाने से सड़क संपर्क भंग हो गया है. ऐसे में ग्रामीणों के लिए आवागमन का एकमात्र साधन नाव रह गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं और वे सूखा राशन, जलावन व पशु चारा जुटाने में लगे हैं.
कई गांवों में चारों ओर फैला बाढ़ का पानी
किशनपुर रतवारा पंचायत के खापुर, गंगापुर पंचायत के मुरहो, छतौना वासा, मुरहो शिव मंदिर टोला, दोकठिया, भवानीपुर वासा, अठगामा मुसहरी, नोनियाचक सहित अन्य गांवों में चारों ओर बाढ़ का पानी फैल गया है. सड़क संपर्क बाधित होने से ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने और अन्य कार्यों के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
पशुपालकों के सामने चारा जुटाने की बड़ी चुनौती
बाढ़ के कारण पशुपालकों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गयी है. पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं होने से सूखा चारा जुटाने की चुनौती बनी हुई है. ग्रामीण अपने स्तर से पशु चारा, जलावन और खाद्य सामग्री का इंतजाम करने में जुटे हैं.
सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल डूबी
बाढ़ के पानी से क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल भी प्रभावित हुई है. खेतों में पानी भर जाने से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. लगातार जलस्तर बढ़ने की स्थिति में फसल को और नुकसान होने की आशंका बनी हुई है.
35 नावों से कराया जा रहा आवागमन
आलमनगर अंचलाधिकारी अंकेश कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन के लिए 35 नावें चलाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से बाढ़ को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
प्रशासन की तैयारियों पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीद
बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों के सामने खाद्य सामग्री, जलावन और पशु चारा की व्यवस्था की चुनौती बनी हुई है. वहीं सड़क संपर्क बाधित होने के कारण नावों पर निर्भरता बढ़ गयी है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार नावों और अन्य राहत व्यवस्था को लगातार उपलब्ध कराया जाएगा.
