नगर परिषद के सफाई कर्मियों की हड़ताल जारी रहने से शहर में कूड़े का नहीं हो रहा उठाव
नगर परिषद में स्थायी पद पर बहाली की मांग कर रहे हैं सफाई कर्मी बैठक भी रही बेनतीजा
मधेपुरा : नगर परिषद सफाई कर्मी की हड़ताल के डेढ़ महीने हो चुके हैं लेकिन इस मामले में चल रहे गतिरोध को समाप्त नहीं किया जा सका है. इसका नतीजा है कि शहर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है. ये लोग एनजीओ के तहत दैनिक भत्ते पर काम करने के लिए तैयार नहीं हैं. इन मामलों का अब तक हल नहीं निकल पाया है. हालांकि रविवार को प्रशासन ने इस दिशा में गतिरोध दूर करने के लिये सफाई कर्मियों के साथ हुई बैठक बेनतीजा ही रही. इसके कारण शहर में न डोर टू डोर कचरा उठाव की योजना लागू की जा रही है और न नियमित सफाई को ही बरकरार रखा जा रहा है.
बैठक में नहीं हो पाया कोई फैसला : रविवार को जिला प्रशासन और नगर परिषद के सफाई कर्मियों के बीच बैठक बेनतीजा रही. इस बैठक में जिले के आला अधिकारी भी मौजूद थे. लेकिन सफाई कर्मियों ने हड़ताल तोड़ने के लिये लिखित तौर पर उन्हें नगर परिषद में नियमित तौर पर रखने संबंधी आदेश लिखित तौर पर देने की शर्त रख दी. गौरतलब है कि नगर परिषद के सफाई कर्मियों के पद पद स्थायी नहीं हैं लेकिन पचास से ज्यादा सफाईकर्मी नगर परिषद के अंतर्गत काम करते रहे हैं.
सफाई कर्मियों का है बुरा हाल: इधर लगातार हड़ताल के कारण सफाई कर्मियों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है. नगर परिषद के अंतर्गत उन्हें महीने के 26 कार्यदिवस के लिये पांच हजार से अधिक राशि का भुगतान हो जाता था. अब इस राशि के नहीं मिलने के कारण उनका जीवन प्रभावित होने लगा है. तंगहाली के कारण बच्चों की परवरिश पर असर पड़ रहा है.
सरकारी निर्देश बनी है बाधा: सरकार के निर्देशानुसार नगर परिषद दैनिक मजदूरों को भुगतान नहीं दे सकता है. हालिया आदेशानुसार नप को आउटसोर्सिंग के जरिये सफाई की व्यवस्था करना है. शहर में सफाई के लिये निविदा के जरिये दो एनजीओ को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है. लेकिन सफाई कर्मियों ने एनजीओ के तहत काम करने से इनकार कर दिया और हड़ताल पर चले गये. इसके साथ उन्होंने अन्य बाहरी मजदूरों को भी काम नहीं करने देने की बात कही थी.
जेसीबी से कचरा उठा रहे हैं एनजीओ
स्थानीय सफाई कर्मियों की हड़ताल एवं बाहर के कर्मियों के विरोध के कारण एनजीओ काम करने में असमर्थ हो रहे हैं. शहर में सड़क के किनारे पड़े कचरे को वे जेसीबी से उठा रहे हैं जो कारगर साबित नहीं हो रहा है. नगर परिषद प्रशासन को लगभग एक माह पूर्व ही एनजीओ ने लिख कर दिया गया था कि उनके मजदूरों को काम नहीं करने दिया जा रहा है. बाहरी मजदूरों का लगातार विरोध होते रहने के कारण मुख्य सड़क से भी कचरे का उठाव काफी मश्किल कार्य साबित हो गया है.
कैसे सुलझे मामला, पसोपेश में अधिकारी
अब स्थिति यह है कि कार्यपालक पदाधिकारी पशोपेश में हैं. नियमानुसार दैनिक वेतन भुगतान करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मी स्थायी करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है उनलोगों ने अपनी सेवा के स्थायीकरण के लिए हाइकोर्ट में मुकदमा किया है. विगत 15 साल से वे लगातार काम करते रहे हैं.
