समस्या . शहर में लोगों को आने-जाने में होती है परेशानी
शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है. अब लोकल जाने-आने के लिए केवल रिक्शा काफी नहीं रहा. इसमें कहीं-कहीं बैट्री चलित रिक्शा दिखायी देने लगा है. हालांकि, शहर में मधेपुरा से सिंहेश्वर के लिए चलने वाले ऑटो रिक्शा की अहम भूमिका है. लेकिन अब जरूरत है बढ़ते शहर में आवागमन की सुविधाओं को बढ़ाये जाने की.
मधेपुरा : मधेपुरा शहर का मतलब स्टेशन से विवि या विद्युत कार्यालय तक करीब तीन किलोमीटर की दूरी दक्षिण से उत्तर की ओर थी. अब यह चकला चौक तक फैल गया है. लेकिन ऑटो केवल स्टेशन से चल कर मुख्य सड़क या बस स्टैंड से हो कर भूपेंद्र चौक होते हुए सिंहेश्वर तक जाते हैं. लोकल सवारी के लिए इन रास्तों के लिए सुलभ और सस्ती सवारी ऑटो ही है. लेकिन इनमें ज्यादा संख्या सिंहेश्वर जाने वालों की होती है इसलिये लोकल सवारी को अधिक इंतजार करना पड़ता है. शहर में अगर बैट्री चलित रिक्शा को लोकल वाहन के तौर पर इस्तेमाल किया जाये तो न केवल स्थानीय आवागमन की समस्या का समाधान होगा बल्कि बैट्री चलित वाहन प्रदूषण के खतरों को भी कम करेंगे.
यातायात के सस्ते और सुलभ हों साधन . किसी शहर की आधारभूत जरूरत है कि वहां यातायात के सुलभ साधन भी हों. लेकिन मधेपुरा में टेंपो के अलावा यातायात के और कोई सुलभ साधन नहीं. शहर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. शहर का पश्चिमी बाइपास पहले नदी का बांध था. अब यहां पूरी तरह बसाहट हो गयी है. वहीं शहर पूर्व दिशा की ओर भी काफी फैल गया है. दक्षिणी छोर से उत्तरी छोर तक करीब तीन किलोमीटर और पूरब से पश्चिम की ओर भी करीब दो किमीटर की चौड़ाई है. वहीं विद्युत रेल इंजन कारखाना के कारण शहर का विस्तार अब चकला चौक तक हो गया है.
अब इतने बड़े शहर में आवागमन के साधन भी जरूरी हैं. निजी चार पहिया वाहन के इस्तेमाल से शहर में जाम की स्थिति पैदा होती है. ऐसे में अगर बैट्री चलित वाहन को बढ़ावा दिया जाये तो न केवल यातायात के साधन विकसित होंगे बल्कि लोगों को सार्वजनिक वाहन के इस्तेमाल की आदत भी पड़ेगी. इसके बारे में युवा नेता गुलजार कुमार बंटी कहते हैं कि अगर घर से निकलने से पहले लोगों को यह यकीन हो कि सड़क पर पहुंचते ही सार्वजनिक वाहन उसे गंतव्य तक पहुंचा देगा तो निजी वाहनों का इस्तेमाल कम होने लगेगा.
स्थानीय निकाय व प्रशासन नहीं कर रहा पहल
ऑटो चालक संघ ने बनायी थी योजना
जिला ऑटो चालक संघ ने करीब तीन साल पहले इस तरह की एक योजना बनायी थी लेकिन उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. इसके बारे में जिला ऑटो संघ के सचिव अमित कुमार कहते हैं कि मधेपुरा – सिहेश्वर को एक इकाई मानते हुए एक लोकल आवागमन की एक योजना बनायी गयी थी. इसमें दूरी के लिए शुल्क निर्धारित करते हुए इस राशि का लोगो ऑटो पर बाहर से लगाया जाना था. इस योजना को लेकर तत्कालीन डीएम से मुलाकात भी की गयी थी. लेकिन इस योजना पर हरी झंडी नहीं मिलता देख प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
बैटरी चलित वाहन को मिले बढ़ावा
बैटरी चलित वाहन धीरे -धीरे प्रचलित होते जा रहे हैं. प्रदूषण और आवाजरहित ये वाहन शहरों में रिक्शा के बेहतर विकल्प के तौर पर अपनाये जा रहे हैं. मधेपुरा में भी अगर इन विकल्पों को बढ़ावा दिया जाये तो ये स्थानीय आवागमन के लिए बेहतर सार्वजनिक वाहन के तौर पर लोकप्रिय होंगे. शहरवासी भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं.
एक एनजीओ से जुड़े आदित्य कुमार झा उर्फ अंशु कहते हैं कि शहर में आवागमन के लिए बैट्री चलित वाहन से बेहतर कुछ नहीं. न शोर और न प्रदूषण. वहीं डा संतोष कुमार का कहना है कि हमें भविष्य को देखते हुए ही आधारभूत संरचनाएं विकसित करनी चाहिए. यातायात में भी यह लागू होता है.
