माॅनसून की लगातार बेरुखी से बढ़ी किसानों की चिंता
यूं तो जिले में माॅनसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन लगता है शायद मधेपुरा से मानसून रूठ गया है. हर रोज कभी सुबह कभी दोपहर तो कभी शाम के समय बादल उमड़ घुमड़ कर आते हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही है. इससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.
मधेपुरा : माॅनसून की लगातार बेरुखी का असर जिले में साफ नजर आ रही है. इस साल मौसम विभाग द्वारा दी गयी सूचनाएं भी सटीक साबित नहीं हो रही है. सरकार भी ऐसी स्थिति से परेशान है और हर जिले से वर्षापात का आंकड़ा प्रखंडवार मंगवाने की कवायद में जुटी हुई है. अधिकतर जिलों में वर्षा का ट्रेड मौसम विभाग द्वारा की गयी भविष्यवाणी से काफी कम है. यही वजह है कि जिले में किसान अभी तक पूरी तरह धान का बिचड़ा डालने का काम भी पूरा नहीं कर पायें हैं. जिले के सभी प्रखंड में वर्षा का 13 अनुपात असंतुलित है.
प्रखंडों से मांगी वर्षापात के आंकड़े . सरकार के निर्देश पर डीएम ने सभी प्रखंडों से वहां हो रहे वर्षापात का आंकड़ा मांगा है. इन आंकड़ों का मिलान कर यह तय किया जायेगा कि जिले में सूखे की स्थिति है या नहीं है. साथ ही मौसम विभाग के द्वारा की गयी भविष्यवाणी और बारिश की भौतिक स्थिति के मिलान से माॅनसून का अंदाजा भी लगाया जा सकेगा. कृषि विभाग के अधिकारी कहते है कि शुरुआती दौर में जिले में बारिश कम हुई है. मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि माॅनसून की स्थिति धीरे – धीरे और बेहतर होगी. बहरहाल औसत से काफी कम बारिश होने से फिलवक्त मधेपुरा सूखे की ओर जाता दिख रहा है.
मधेपुरा से रूठा माॅनसून
यूं तो जिले में माॅनसून ने दस्तक दे दी है. लेकिन, लगता है शायद मधेपुरा से मॉनसून रूठ गया है. हर रोज कभी सुबह कभी दोपहर तो कभी शाम के समय बादल उमड़ घुमड़ कर आते हैं, लेकिन किसानों के हाथ तब मायूसी लगती है. जब बिन बरसात ही बादल वापिस चले जाते हैं. क्षेत्र के किसान धान की खेती को लेकर खासे परेशान हैं.ऐसे खेत जहां सिंचाई की व्यवस्था है वहां तो हालात ठीक हैं लेकिन जहां सिंचाई सुविधा नहीं है वहां तो स्थिति और भी खराब है. आजकल धान के बिचरा का सीजन चला हुआ है लेकिन बारिश न होने की वजह से कहीं कहीं रोपा गया धान का बिच राभी अब सूखने लगा है जिससे क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है. मौसम के लगातार साफ़ रहने से तापमान में भी वृद्धि होने लगी है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की उम्मीद है लेकिन मौसम की बेरुखी से लगता नहीं है कि अभी मेघ बरसेंगे. ऐसे में खेतों में रोपा गया फसल पूरी तरह सूख जायेगा.
